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ग्रामीणों ने शादी के नाम पर हो रहे गोरख-धंधा का किया पर्दा फ़ाश, पुलिस कर रही लापरवाही

स्थानीय सियासत संवादाता, पुर्णियां: बिहार के पूर्णियां जिला के जलालगढ़ प्रखण्ड के गाँव पीपरपांति में एक ऐसे गिरोह का ग्रामीणों ने पर्दा फाश किया है, जिसका काम शादी कराके लड़कियों को एक जगह इकठ्ठा करना था ताकि वह किसी बड़े घटना को अंजाम दे सके. पुलिस मामले की छानबीन करने के बजाय लड़की के पिता को परेशान कर रही है.

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गौरतलब है कि असलम नाम का एक युवक जो खुद को हरदा, पूर्णियां का निवासी बताता है, वह लगभग 9 महीने पहले सोनापुर गाँव के एक लड़की सुलताना पिता अनामुल को फंसाया और उसे लेकर दिल्ली भाग गया, कुछ दिन पहले उसकी पत्नी सुल्ताना अपने घर सोनापुर आई, और वह अपने रिश्तेदार से मिलने सोनापुर से सटे गाँव पीपरपांति गई, वहां उसकी मुलाक़ात आयशा पति ताजुद्दीन से हुई, आयशा सुल्ताना के रहन सहन और आव भाव से काफी प्रभावित हुई, उन्होंने उनसे बताया कि मेरी लड़की शादी के लायक है, तुम उसके लिए एक लड़का ढूंढ दो, तो उन्हों ने हाँ भर दी.

2-3 दिन के अंदर ही सुल्ताना के पति असलम एक-दो लड़के को ले कर आया जिसमें से आयशा ने एक लड़के के साथ अपनी बेटी को बिना शादी कराए विदा कर दिया, फिर 10 दिन के बाद असलम दुसरे लड़के को लेकर आया, जिसका निकाह मोहम्मद शाहिद अंसारी की बेटी से करा दिया, इन दोनों लड़कियों को किशनगंज में किराये के मकान में रखा. इसके 10 दिन बाद ही मुहल्ले के 3 और लडकीयों के मां-बाप को चिकनी-चपड़ी बातों से लुभाया, और लड़कों को हरदा, पुर्णियां के खुदना गाँव का बता कर निकाह के लिए राज़ी कर लिया, स्थानीय निवासी बबलू अंसारी को उस पर संदेह हुआ उसने पंचायत के समिति को फोन कर बुलाया, जिसने दुल्हे से आधार कार्ड माँगा, जिसके बाद दूल्हा मौक़ा पा कर फ़रार हो गया.

उसके बाद बारातियों के साथ एक दुल्हे को बंधक बना लिया गया, बारात आये दो दंपति का कहना है कि वह दुल्हे का मकान मालिक है, गौरतलब है कि असलम जो इस पुरे घटने को अंजाम दे रहा था वह हालात की गंभीरता को भांप गया, और वह मौक़े पर नहीं पहुंचा था. सुबह पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद पुलिस मौके पर आई, पुलिस उन लड़कियों और बारातियों को थाने ले गई.

मोहसिन नाम के बुज़ुर्ग व्यक्ति ने बताया कि फरार दुल्हे से उनकी बेटी का निकाह हो चूका था और वह उन से 50 हजार रुपये भी ले लिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने कुछ गाँव वाले और बालसखा के बचपन कार्यक्रम के कर्मी के साथ थाने में 6 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज कराया, जिसका रिसीविंग पुलिस ने नहीं दिया. अगले दिन सुबह पुलिस ने बुज़ुर्ग मोहसिन से यह कह कर 500 रपये ऐंठ लिया कि इस पैसे से वह केस को आगे बढ़ाएगा. जबकि मोहसिन के अनुसार पुलिस और पैसे की डिमांड की थी और वह दुबारा आने का कहकर चला गया.

पीपरपांति गाँव के लोग इस घटने से आहत हो कर 7 अप्रैल को मास्टर पिंटू अंसरी और आरफीन अंसारी के अधयक्षता में बैठक बुलाई, इस घटने का मूलकारण दहेज प्रथा को बताया, और बैठक में तय पाया कि एक दहेज़-विरोधी कमिटी का गठन किया जायेगा.

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