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घरों से कचरा उठाने वाले अमले की लापरवाही , चार चार दिन तक ग़ायब

हैदराबाद १६जनवरी ( सियासत न्यूज़) ।पुराने शहर के बेशतर इलाक़ा जात के मकीनों को बलदिया कि इन अमला की लापराही कासामना करना पड़ रहा है जिसे घरों से कचरा उठाने पर मामूर किया गया है।इत्तिला के मुताबिक़ हाना पैसे वसूल करते हुए घरों में

हैदराबाद १६जनवरी ( सियासत न्यूज़) ।पुराने शहर के बेशतर इलाक़ा जात के मकीनों को बलदिया कि इन अमला की लापराही कासामना करना पड़ रहा है जिसे घरों से कचरा उठाने पर मामूर किया गया है।इत्तिला के मुताबिक़ हाना पैसे वसूल करते हुए घरों में से कचरा उठाने वाले अमले की लापरवाही से इलाक़े के मकीन काफ़ी परेशान हैं चूँकि ये अमला चार चार पाँच पाँच दिन तक ग़ायब होजाते हैं,जिस की वजह से इतने दिनों तक घरों मेंही कचरा पड़ा रह जाता है,नतीजतन ये कचरे ना सिर्फ़ बदबू और ताफ़्फ़ुन का सबब बनता है बल्कि घरों में मौजूद मासूम बच्चों की सेहत के लिए भी काफ़ी नुक़्सानदेह साबित हो रहा है।

ज़राए के मुताबिक़,शहर के मुख़्तलिफ़ इलाक़ा जात में बलदिया की जानिब से जिन सूपरवाइज़र स को मुक़र्रर किया गया है वो अमले की मुक़र्ररा तादाद के बजाय कम से कम अमले के ज़रीया काम निपटाने की कोशिश करते हैं ताकि उन्हें ज़्यादा से ज़्यादा रक़म बच सके ,नतीजतन एक एक अमला को तीनता चार महलों की ज़िम्मेदारी देदी गई है जिसकी वजहा से ये आज उस मुहल्ले में तवक्कुल दूसरे मुहल्ले में और इस तरह एक मुहल्ले की बारी तीन चार दिन में आती है।

इत्तिला के मुताबिक़,इलाक़ा जहांनुमा इलाक़ा ,दूध बाओली ,ग़ाज़ी बंडा ,मिस्री गंज ,ताड़बन,रनमस्त पूरा ,बहादुर पर ,किशन बाग़ के मुहल्ला जात के घरों से कचरा उठाने वाले अमले में इस किस्म की लापरवाही बहुत ज़्यादा बताई जाती है।मुक़ामी अफ़राद ने बताया कि मुताल्लिक़ा अमला हरमाह पाबंदी से अपना मुक़र्ररा मुआवज़ा ले जाता है मगर ऐसी पाबंदी वो कचरा ले जाने में नहीं करता,उन्हों ने कहा कि उसूलन तो उसे रोज़ कचरा ले जाना चाहीए चूँकि ये घरेलू साफ़ सफ़ाई का मुआमला है जो रास्त सेहत से ताल्लुक़ रखता है , मगर ये लोग एक दिन आड़ एक दिन कचरा ले जाता है तो ये भी किसी हद तक का बिल बर्दाश्त है मगर गुज़शता चंद महीने से कचरा उठाने वाला ये अमला चार चार पाँच पाँच दिन तक ग़ायब हो जाता है

जिस से एक तरफ़ तो ज़्यादा कचरा जमा हो जाता है तो दूसरी तरफ़ बदबू और ताफ़्फ़ुन से पूरे घर के माहौल पर असर पड़ता है और उन्हें काफ़ी ज़हनी कोफ्त होती है, चूँकि बलदिया का दीगर अमला जो सड़कों और गली कूचों में साफ़ सफ़ाई का काम अंजाम देता है वो घर के कचरों को लेने राज़ी नहीं होता।

ताड़बन के एक मकीन ग़ाज़ी उद्दीन ने कहा कि महिकमा-ए-सेहत-ओ-सफ़ाई की लापरवाही से कई एक मसाइल पैदा होरहे हैं ,उन्होंने कहा कि घरों से कचरा उठा ने वाले अमले को सिर्फ़ कचरे की गाड़ी देकर छोड़ दिया जाता है मगर इसकी निगरानी का कोई मोस्सर इंतिज़ाम ना होने से ये अमला मनमानी करता रहता है जिन्हं कोई कुछ बोलने वाला नहीं ।

उन्हों ने मज़ीद कहा कि आम तौर पर एक अमला दो या तीन इलाक़ों का अहाता करता है ,यानी आ ज एक इलाक़े से कचरा उठाया तवक्कुल दूसरे इलाक़े सी, इसी लिए ये लोग एक दिन आड़ एक दिन आते हैं मगर ज़्यादा से ज़्यादा पैसे कमाने की लालच में एक एक अमला तीन तीन चार चार इलाक़े की ज़िम्मेदारी ले लेता है और यही वो अहम वजह है कि ये लोग एक इलाक़ों से इतने दिनों तक ग़ायब रहते हैं ।

उनके मुताबिक़ अगर उन लोगों को सख़्ती से कुछ बोला जाये तो मुख़्तलिफ़ बहानों के ज़रीया बात को टालने की कोशिश करते हैं। मज़कूरा इलाक़ों के मकीनों ने रोज़नामा सियासत के ज़रीया महिकमा बलदिया से मुतालिबा(मांग‌) किया है कि कचरा उठाने वाले इन अम्लों पर मुकम्मल निगरानी रखा जाये और उन्हें रोज़ाना पाबंदी के साथ घरों में से कचरा ले जाने के लिए पाबंद किया जायेता कि अवाम मज़ीद ज़हनी-ओ-जिस्मानी परेशानीयों से महफ़ूज़ रह सके।

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