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चाइल्ड मैरेज बिल ग़ैर इस्लामी है

पाकिस्तानी क़ानून साज़ों ने चाइल्ड मैरेज से मुताल्लिक़ वो बिल वापिस ले लिया है, जिसके तहत शादी की क़ानूनी उमर सोला साल से बढ़ा कर अठारह बरस की जाना थी। पर्लीमानी केमटी बराए मज़हबी उमूर ने इस बल को तौहीन मज़हब क़रार दे दिया।

पकिस्तान में अक्सर औक़ात लड़कीयों की शादियां कम उमरी में कर दी जाती हैं। हुकूमती जमाते-ए-मुस्लिम लीग की ख़ातून रुकन पार्लीमान मारवी मैमन और दीगर अराकीन मैरेज बिल में क़ानूनी तौर पर तबदीली लाने की ख़ाहिशमंद थे।

नए तजवीज़ कर्दा बिल के तहत लड़कीयों की शादी की उम्र क़ानूनी तौर पर सोला बरस से बढ़ा कर अठारह बरस की जाना थी और इस की ख़िलाफ़वर्ज़ी करने वालों के लिए दो बरस क़ैद की सज़ा तजवीज़ की गई थी।

इस बाबत इत्तिलाआत के हामिल एक ज़राए ने बताया कि मारवी मैमन ने कम उमरी में शादीयों से मुताल्लिक़ क़ानून में तबदीली से मुताल्लिक़ एक मुसव्वदा पेश किया, ताहम पर्लीमानी कमेटी बराए मज़हबी उमूर की जानिब से मुस्तरद कर दिए जाने पर उन्हें क़ौमी असैंबली से इस मुसव्वदे को वापिस लेना पड़ गया।

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