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चारमीनार की दर-ओ-दीवार आशिकों के नामों और तहरीरों से भर गइं

नुमाइंदा ख़ुसूसी दुनिया भर में हैदराबाद को चारमीनार का शहर कहा जाता है । जैसे आगरा को ताज महल का शहर कहते हैं । हिंदूस्तान बिलख़सूस हैदराबाद की शान और वक़ार की हैसियत रखने वाले क़ुतुब शाही फ़न तामीर के लाफ़ानी शाहकार चारमीनार क

नुमाइंदा ख़ुसूसी दुनिया भर में हैदराबाद को चारमीनार का शहर कहा जाता है । जैसे आगरा को ताज महल का शहर कहते हैं । हिंदूस्तान बिलख़सूस हैदराबाद की शान और वक़ार की हैसियत रखने वाले क़ुतुब शाही फ़न तामीर के लाफ़ानी शाहकार चारमीनार के तज़किरा के बगैर हैदराबाद की तारीख की तकमील किया इबतदा -भी मुम्किन नहीं । ये इमारत अपने ख़ूबसूरत नक़्शे , मुतनासिब और मुतवाज़िन तामीर के लिहाज़ से जुनूबी हिंद की यादगारों में एक मुमताज़ दर्जा रखती है । मगर अफ़सोस कि 421 साला क़दीम ये ख़ूबसूरत तरीन , जाज़िब-ए-नज़र, मुतास्सिर कुण और आलमी शोहरत याफ़ता इमारत आज अपनी बदहाली का शिकवा करती नज़र आती है ।

राक़िम उल-हरूफ़ ने हिंदूस्तान की तारीख़ी और यादगार तामीरात में इंतिहाई शोहरत की हामिल इस इमारत का जब गहरा जायज़ा लिया तो ये देख कर बहुत तकलीफ हुई कि सिक्योरिटी नाम की वहां कोई चीज़ ही मौजूद नहीं । एक दो सिक्योरिटी गार्ड्स मौजूद भी हैं तो उन का वजूद बराए नाम ही है । जिस का सबूत ये है कि इस दिलकश इमारत के दर-ओ-दीवार पर अजीब-ओ-गरीब तहरीरों से भरे हुए हैं । कहीं बेलगाम आशिकों ने अपने नाम और पयाम मुहब्बत तहरीर कर दीए हैं तो कहीं ज़हनी-ओ-नफ़सयानी बीमारी के शिकार और फ़हश ख़्यालात के हामिल अफ़राद ने गालियां लिख दी हैं । जब कि दीवारों को किसी ना किसी बहाने ख़राब करने के आदी अनासिर ने सिकूं और नोकदार फ़ौलादी अशिया-ए-से जगह जगह दीवारें खर्च दी हैं ।

हद तो ये कि अख़लाक़-ओ-किरदार से महरूम उश्शाक ने दीवारों , अंदरून राहदारियों और सीढ़ियों पर अपने नाम लिखने के लिए बाक़ायदा पेंट्स का इस्तिमाल किया । बाअज़ मुक़ामात पर इतनी ऊंचाई पर नाम लिखे गए हैं जहां सिर्फ सीढ़ियों के ज़रीया ही रसाई हासिल होसकती है । मुम्किन है दोस्तों के काँधों पर पाउं रख कर बद अख़लाक़ अनासिर ने ये गैर अख़लाक़ी इक़दाम क्या हो । अगर सिक्योरिटी जवान चौकस होते तो इस तरह की गैर ज़िम्मा दाराना हरकात करने की किसी को हिम्मत नहीं होती । सवाल पैदा होता है कि पेंटब्रश का इस्तिमाल करते हुए जब दीवारों पर लिखा जा रहा था , यह सकूं और नोकदार फ़ौलादी अशिया-के ज़रीया खर्च कर नाम कुंदा किए जा रहे थे उस वक़्त सिक्योरिटी जवान कहां सो रहे थे ।

मालूम रहे कि हैदराबाद का क़लब मानी जाने वाली इस पर शिकवा इमारत को इस की क़वी अफादियत-ओ-अहमियत के पेश नज़र आरक्योलोजीकल सर्वे आफ़ इंडिया की निगरानी में दे दिया गया है । यही वजह है कि चारमीनार की ऊपरी मंज़िलों में तैनात सिक्योरिटी जवानों का ताल्लुक़ दीगर रियासतों से है । एक मुक़ाम पर सिक्योरिटी जवान को हम ने देखा जो कानों में आएर फ़ोन ठूंसे इस अंदाज़ में गाने सुनने में मसरूफ़ था । चारमीनार के ऊपरी हिस्सों में जहां सिक्योरिटी कानाक़िस इंतिज़ाम है वहां एसा लगता है कि अर्सा से उन हिस्सों की सफ़ाई नहीं की गई । हालाँकि इस मक़सद के लिए दो औरतों को मुक़र्रर किया गया है । इस इमारत में कईमुक़ामात पर बोर्डस लगाए गए हैं ।

जिस पर तेलगू , हिन्दी और अंग्रेज़ी में वाज़िह तौर पर तहरीर है कि सिगरेट नोश और दीवारों पर किसी किस्म की तहरीर बिलकुल ममनू है । इस के बावजूद आप ख़ुद मुशाहिदा करसकते हैं कि चारमीनार का कोई हिस्सा भी ग़लत तहरीरों , फ़हश कलिमात और आशिकों के नामों से ख़ाली नहीं है । जिन्हें देख कर ये एहसास होता है कि नफ़सियाती बीमारी के शिकार इन अनासिर को इस तारीख़ी इमारत और इस के बानी सुलतान मुहम्मद क़ुली क़ुतुब शाह से एक किस्म का हसद होगया हो । यही वजह है कि ये लोग चारमीनार के दर-ओ-दीवार पर गंदे अलफ़ाज़ के मीनार बना रहे हैं और अपने परागंदा ख़्यालात को अलफ़ाज़ की शक्ल में इन ख़ूबसूरत दीवारों पर बिखेर रहे हैं ।

हालाँकि उन्हें पता होना चाहीए कि चारमीनार सिर्फ एक तारीख़ी इमारत यह आसार के लिहाज़ से एक क़ौमी असासा ही नहीं बल्कि ये हमारी तहज़ीब-ओ-तमद्दुन और तामीरी शौक़-ओ-ज़ौक़ की पहचान है । जो दुनिया को ये बताती है कि उसे वक़्त जब कि दुनिया बिलख़सूस हमारे मुल़्क की रियासतें तरक़्क़ी के मानी-ओ-मतलब से भी ना आश्ना थीं । हैदराबाद तरक़्क़ी की चोटियों पर फ़ाइज़ था जहां असरी आबी निज़ाम से लेकर एक वसीअ-ओ-अरीज़ शहर की तामीर के मंसूबे यानी टाउन प्लानिंग के लिए ख़ुसूसी शोबा हुआ करता था । जहां इंजीनीयरों की अच्छी ख़ासी तादाद शहर को ख़ूबसूरत बनाने बुलंद-ओ-बाला वसीअ-ओ-अरीज़ और माहौलयात के मुवाफ़िक़ इमारतों के तामीरी मंसूबों को क़तईयत देती थीं ।

बहरहाल आज चारमीनार की हालत-ए-ज़ार देख कर बहुत अफ़सोस होता है जैसा कि हम ने बताया कि सिक्योरिटी का इंतिहाई नाक़िस इंतिज़ाम किया गया है । आप को बतादें कि चारमीनार की पहली मंज़िल पर ही जाने की इजाज़त है जब कि दूसरी मंज़िल सय्याहों और अवाम के लिए 1986 से बंद करदी गई है । क्यों कि 17 नवंबर 1986 को गरीबी का शिकार एक ही ख़ानदान के 5 अफ़राद एक भाई और चार बहनों ने दूसरी मंज़िल से छलांग लगाकर ख़ुदकुशी करली थी । कुछ अर्सा क़बल एक सूदखोर ने हालात की शिकार एक नौजवान लड़की को धक्का दे कर हलाक कर दिया था । ये वाक़िया 12 जून 2009 को पेश आया था । जिसका नाम समीरा और मुबय्यना मुल्ज़िम का नाम इरशाद बताया गया ।

जहां तक इस बावक़ार इमारत की तारीख का सवाल है तो ये बताना ज़रूरी है कि इस आलीशान चारमीनार को क़ुतुब शाही हुक्मराँ सुलतान मुहम्मद क़ुली ने 1590-91 में तामीर करवाया । शहर केएन वस्त में पत्थर और गुच्ची से बनाई गई इस इमारत की हर सिम्त 4 फिट अरीज़ और 42 फिट बुलंद है वसती इमारत चार अज़ीम उल-शान महिराबदार दालानों परमुश्तमिल है । जिस का साइज़ 24×30 फ़ुट बताया जाता है । बालाई इमारत दो मंज़िला है ऊपर के चार गोशों पर चार बुलंद मीनार अपनी अज़मत का एहसास दिलाते रहते हैं । हर मीनार का इर्तिफ़ा 80 फिट और सतह ज़मीन से उन की बुलंदी 140 फिट है ।

चारमीनार की पहली मंज़िल पर तलबा का मदर्रसा और दार-उल-अक़ामा था । इस ग़ैरमामूली इमारत की तामीर पर उस वक़्त 9 लाख रुपय के मसारिफ़ आए थे । चारमीनार में जुमला 146 सीढ़ियां हैं । 1889 मैं चारमीनार की चारों सिम्त पहली मंज़िल पर घड़ियां नसब की गएं । जो फ़्रांसीसी कमांडर जैन बक्सी ने 4 दिसंबर 1889 को नसब की थीं । आजकल इन घड़ियों की देख भाल की ज़िम्मेदारी महिकमा आरक्योलोजीकल ने वाहिद वाच कंपनी लाड बाज़ार को तफ़वीज़ की है ।

तारीख़ी कुतुब के मुताबिक़ इस इमारत में दूसरी मंज़िल पर मौजूद मस्जिद में 200 मुस्लियों की गुंजाइश है । बहरहाल इस रिपोर्ट का मक़सद ये है कि महकमा आरक्योलोजीकल अपने फ़राइज़ का सबूत देते हुए फ़ौरी हरकत में आए और यहां बेहतर सिक्योरिटी का बंद-ओ-बस्त करे । नीज़ दीवारों पर लिखी गइ इबारतों से उन दीवारों को साफ़ करे और इस अज़ीम क़ौमी और तारीख़ी विरसा की सफ़ाई सुथराई और हिफ़ाज़त को यक़ीनी बनाए । यहां आने वाले हर फ़र्द पर कड़ी नज़र रखी जाय जिस के लिए जदीद कैमरों का सहारा लिया जा सकता है ।।

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