Tuesday , October 17 2017
Home / District News / चावल की काश्त से किसानों की अदम दिलचस्पी

चावल की काश्त से किसानों की अदम दिलचस्पी

येल्लारेड्डी,18 जनवरी: कम पानी से काश्त होने वाली मकई की फ़सल को काश्त करने के लिए किसानों में ग़ैरमामूली दिलचस्पी नज़र आरही है। येल्लारेड्डी हलक़े के तमाम मंडलों में जुमला 22 हज़ार एकड़ से ज़ाइद मकई की फसलें काश्त की जा रही हैं। इस साल बार

येल्लारेड्डी,18 जनवरी: कम पानी से काश्त होने वाली मकई की फ़सल को काश्त करने के लिए किसानों में ग़ैरमामूली दिलचस्पी नज़र आरही है। येल्लारेड्डी हलक़े के तमाम मंडलों में जुमला 22 हज़ार एकड़ से ज़ाइद मकई की फसलें काश्त की जा रही हैं। इस साल बारिश भी बहुत कम होने पर किसान बहुत मायूस थे लेकिन आख़िर में ग़ैरमामूली बारिश ने फसलों को ज़िंदगी बख़शी लेकिन तमाम आबी ज़खीरे लबरेज़ होकर बहने लगे जिस से किसानों के चेहरों पर मुस्कुराहट कुछ हद तक वापिस आई।

आबी ज़खीरे वाला पोचारम परोजक्ट की आबी सतह बहुत इत्मीनान बख्श है लेकिन बर्क़ी की नाक़िस सरबराही पर ज़्यादा तर किसान धान की काश्त करने से ख़ौफ़ कर रहे हैं। बर्क़ी के अदम तवाज़ुन से खड़ी फसलें सूख रही हैं और कम आब से काश्त होने वाली फ़सल मकई को रबीआ सीज़न के लिए बेहतर समझते हुए किसान उस को करने के लिए ग़ैरमामूली दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

गुज़िशता साल कुंटल मकई की 1600 रुपये तक कीमत मुक़र्रर की गई थी और गुज़िशता दो सालों से ही मकई की काश्त में इज़ाफ़ा हुआ है। फ़ी एकड़ 20 , 25 क्विंटल तक मकई हाथ आए पर किसानों को ख़ासा नफ़ा हो रहा है । आजकल मकई की काशत उरूज पर होने की ख़ास वजह पोल्ट्री सनअत और बेकरी के खाने पीने की चीज़ों की तयारी Pop-Corn वगैरह में कसरत से इस्तिमाल से बाज़ार में इस का मुतालिबा उरूज पर है और मकई की काश्त के लिए फ़ी एकड़ सिर्फ़ पाँच ता सात हज़ार रुपये ही ख़र्चा आता है और एकड़ पर काश्त करने पर किसान को 25 से 30 हज़ार रुपये तक नफ़ा होता है।

इसी लिए कम ख़र्च से ज़ाइद नफे पर किसान मकई फसलों को काश्त करने के लिए फ़ौक़ियत दे रहे हैं। हलक़ा में येल्लारेड्डी पर 1500 एकड़ में मकई की काश्त की जा रही है तो सदाशीव नगर मंडल में 1500 एकड़ पर गंधारी मंडल में 11820 एकड़ मंडल लिंगम पेट‌ में 4250 एकड़ ताड़वाई मंडल में 3100 एकड़ पर और मंडल नागी रेड्डी पेट‌ में 270 एकड़ पर मकई की फसलें खड़ी हैं।

इस साल हुकूमत ने रबीआ सीज़न में मकई की तुख़्म सब्सीडी पर सरबराह नहीं की है जिस पर किसानों में सख़्त मायूसी पाई जाती है। फसलों की काश्त के लिए हौसला देने वाली हुकूमत सब्सीडी पर तुख़्म सरबराह करने में नाकाम हुई है। फिर भी किसानों ने कसरत से मकई की फसलों में ग़ैरमामूली दिलचस्पी से काम लेते हुए अपने नफे को यक़ीनी बनाया है। काश हुकूमत सब्सीडी पर तुख़्म सरबराह करती तो मकई की काश्त में मज़ीद इज़ाफ़ा होसकता था। लेकिन एसा नहीं हुआ। इस के बावजूद किसानों की ग़ैरमामूली दिलचस्पी क़ाबिले तारीफ़ है।

TOPPOPULARRECENT