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खेलों में चीन को सुपर पावर बनाने का राष्ट्रपति झी जिनपिंग का लक्ष्य, निवेश 600 मिलियन पाउंड

लंदन : चीन के राष्ट्रपति झी जिनपिंग का इस खेल के लिए प्यार किसी से छुपा नहीं है और वह इस खेल को देश में बढ़ावा देने के लिए पैसों को पानी की तरह बहा रहे हैं। देश की सुपर लीग में इन दिनों इतना पैसा है जितना पहले कभी भी नहीं देखा गया।

शंघाई एसआईपीजी ने चेल्सी को 58 मिलियन पाउंड देखर इसी महीने ब्राजीली स्टार ऑस्कर को खरीदा और मैनचेस्टर सिटी के सितारा खिलाड़ी कार्लोस तेवेज शंघाई शेनहुआ से 614000 पाउंड प्रति सप्ताह के अनुबंध पर जल्द ही हस्ताक्षर होने जा रहे हैं।

शंघाई में इस समय चीन के सबसे महंगे फुटबॉलर ऑस्कर हैं, जिन्हें 4 लाख पाउंड प्रति सप्ताह मिल रहे हैं। तेवेज का यह अनुबंध उन्हें सबसे महंगे फुटबॉलर के तौर पर लियोनेल मैसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो से कहीं आगे खड़ा कर देगा।

चीनी क्लबों को कार्पोरेट घरानों से मिल रहे जबर्दस्त समर्थन की बदौलत ही यह क्लब यूरोपिय और दक्षिण अमेरिकी सितारों को बड़ी रकम देकर अपने लिए खेलने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। चीन मीडिया कैपिटल के साथ हाल ही में हुए 935 मिलियन पाउंड के साथ नए अनुबंध से चीनी सुपर लीग में अगले पांच वर्षों में दर्शकों की संख्या और बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

शंघाई एसआईपीजी, शंघाई शेनहुआ, जियान्गसू सुनिंग और पिछले छह वर्षों से स्थानीय चैंपियन ग्वांगझू एवरग्रेंड तओबाओ ने इसमें सबसे ज्यादा खर्च किया है और बड़े-बड़े सितारों को अनुबंधित किया है।

राष्ट्रपति झी जिनपिंग ने 10 साल की रणनीति बनाई है, जो 2015 से 2025 तक है। इसमें देश के खेलों में निवेश को 600 मिलियन पाउंड से दोगुना करने का है। वह निचले स्तर से एक लाख खिलाड़ी तैयार करना चाहते हैं और 20 हजार नए फुटबॉल स्कूल और 2020 तक 70 हजार मैदान तैयार करना चाहते हैं।

उनकी रणनीति चीन को इस खेल में सुपर पावर बनाने का है, जो विश्व कप की पात्रता हासिल करने, मेजबानी करने और इसके बाद उसे जीतने में सक्षम हो। उनका कहना है कि वह चाहते हैं कि चीन अगले 15 सालों में विश्व कप जीते। चीन इस समय फीफा रैंकिंग में 83वें स्थान पर है।

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