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चुनाव प्रचार में ज्योतिष के सहारे अखिलेश

प्रतीकात्मक तस्वीर

सियासत संवाददाता: मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं। अब पार्टी, संगठन, कार्यकर्ता और नेता सब उनके हवाले हैं। धड़ाधड़ टिकट कट और मिल रहे है। अखिलेश भी अब चुनावी प्रचार में व्यस्त हैं। वैसे सपा को आधुनिक बनाने का ज़िम्मा और उसकी परम्परागत छवि तोड़ने का श्रेय अखिलेश यादव को जाता हैं लेकिन इस चुनावी प्रचार में वो अभी ज्योतिष का सहारा ले रहे हैं।

सपा के सूत्रों की माने तो अखिलेश ने अपना चुनावी प्रचार सुल्तानपुर जिले से इसी वजह से किया था। वजह पता चल रही है कि ऐसा ज्योतिष के कारण हुआ। वैसे तो चुनाव के पहले चरण पश्चिम में हैं, लेकिन अखिलेश ने सुल्तानपुर से चुनाव प्रचार करने का फैसला लिया। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योतिष के दिशा शूल नियम के अनुसार मंगलवार को शुभ काम के लिए पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं की जाती है। रैली मंगलवार को ही थी, इसीलिए अखिलेश ने सुल्तानपुर चुना। दूसरा कारण ये भी है कि यही से 2012 के विधान सभा में प्रचार की शुरूआत करके अखिलेश चुनाव जीते और सरकार बनाई थी।

ज्योतिष का सहारा अखिलेश काफी ले रहे है। अभी 20 दिसंबर 2016 को अखिलेश ने एक साथ 4000 परियोजनाओं का उदघाटन किया था। एक साथ इतने उद्घाटन करने का मकसद इसीलिए क्योंकि वो दिन भी ख़ास बताया गया। उस दिन भी मंगलवार था और काफी लम्बे समय के बाद शुभ योग त्रिपुष्कर योग और सवार्थ सिद्ध योग एक साथ पड़ा था। फिर क्या था, लगा दी उद्घाटनों की झड़ी।

इधर अखिलेश ने अपने नए घर का गृहप्रवेश भी ज्योतिष के अनुसार किया है। समाजवादी पार्टी में अक्सर कई ज्योतिष दिख जाते है जिनके हाथ में कागज़ होते है और वो दावा करते हैं कि उन्होंने ही बहुत पहले भविष्यवाणी करी थी कि अखिलेश मुख्यमंत्री बनेंगे।

वैसे भी अखिलेश उत्तर प्रदेश में चली आ रही प्रथा कि कोई भी नेता मुख्यमंत्री रहते हुए अगर नोएडा गया तो उसकी कुर्सी गई वाली परंपरा को मानते आए है। वो नोएडा जाने से बचते रहे है। कार्यक्रम अगर वहां प्रस्तावित थे तो उनको दिल्ली में करवा दिया गया और अगर कोई उद्घाटन होना था तो अपने सरकारी आवास 5-कालिदास मार्ग से कर दिया गया। बहुत ज्यादा हुआ तो नोएडा से विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग कर ली।

वैसे नोएडा के बारे में सिर्फ अखिलेश को कहना ठीक नहीं है। नोएडा को लेकर मान्यता है कि जो भी मुख्यमंत्री यहाँ गया वो दोबारा नहीं बना। सबसे पहले 1989 एन. डी. तिवारी गए तो उनकी कुर्सी चली गई, 2001 में राजनाथ सिंह ने नोएडा में फ्लाईओवर का उद्घाटन कर दिया तो फिर आज तक मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। 2006 में मुलायम सिंह के रहते हुए नोएडा में निठारी काण्ड हुआ, बहुत बवाल मचा, लेकिन मुलायम किसी भी तरह नोएडा नहीं गए। इसी तरह 2011 में मायावती भी नोएडा गईं और उनकी भी कुर्सी चली गई।

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