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चुनाव से पहले ही बिखरने लगा इत्तेहाद फ्रंट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान मुस्लिम वोट बैंक को कैश करा कर कुछ सीटें हथियाने का सपना देख रहे
इत्तेहाद फ्रंट का शीराज़ा बिखरने लगा है। छोटी छोटी सियासी मुस्लिम पार्टियों को जोड़ तैयार किया गया यह भानुमति का कुनबा
अब साथ नहीं रहना चाहता। सबके अपने मकसद हैं, जो फ्रंट में रहते पूरा नहीं होता दिख रहे। ऐसे में मुस्लिम लीग और मुस्लिम मजलिस ने इसका साथ छोड़ अपनी पुरानी राह पकड़ ली है।
हालाँकि इत्तेहाद फ्रंट के गठन के समय पीस पार्टी, इंडियन नेशनल लीग, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय उलेमा कांउसिल, सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ इंडिया, मुस्लिम मजलिस, मुस्लिम लीग, परचम पार्टी और इत्तेहाद.ए.मिल्लत के पदाधिकारियों ने बड़े बड़े दावे किये थे। उस समय मुस्लिम एकता की दुहाई देकर ओवैसी की पार्टी को फ्रंट से जोड़ने का भी दावा किया गया था, जो सिरे नहीँ चढ़ा। यहाँ
तक कि मोख्तार अंसारी के कौमी एकता दल ने भी अब तक फ्रंट में आने की मंशा ज़ाहिर नहीं की है। फ्रंट में शामिल पीस पार्टी के मुखिया डॉक्टर अयूब खलीलाबाद से विधायक हैं। उन्होंने भी अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं कि फ्रंट ही रहेंगे, अकेले लड़ेंगे या किसी अन्य पार्टी के अनुसार अपनी भूमिका अदा करेंगे।

लखनऊ से एम ए हाशमी

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