Wednesday , October 18 2017
Home / Hyderabad News / चौमहल्ला पैलेस के अक्बी दरीचों के वजूद को ख़तरा

चौमहल्ला पैलेस के अक्बी दरीचों के वजूद को ख़तरा

हैदराबाद 19 जनवरी : चौमहल्ला पैलेस शहर हैदराबाद फ़रख़ंदा बुनियाद की अज़मत रफ़्ता की निशानियों में से एक है इस महल को देखने यहां मौजूद नादिर और नायाब तसावीर , क़दीम तलवारों , ढालों नक़्शो निगार और अक्ल को दंग कर देने वाले मुजस्समों

हैदराबाद 19 जनवरी : चौमहल्ला पैलेस शहर हैदराबाद फ़रख़ंदा बुनियाद की अज़मत रफ़्ता की निशानियों में से एक है इस महल को देखने यहां मौजूद नादिर और नायाब तसावीर , क़दीम तलवारों , ढालों नक़्शो निगार और अक्ल को दंग कर देने वाले मुजस्समों के साथ साथ शाही मलबूसात और दीगर सामान का मुशाहिदा करने के लिए ना सिर्फ़ मुल्क के कोने कोने से सैयाह आते हैं बल्कि बैरून मुल्क के सैयाहों की कसीर तादाद भी इन नादिर अशिया को देख कर हैरत में डूब जाती है।

ख़िलवत मुबारक में वाक़े चौमहल्ला पैलेस की निगरानी के ज़िम्मेदार जी किशन राव हैं। क़ारईन, आदिल शाही क़ुतुब शाही आलमगीरी या फिर आसिफ़ जाहि दौर की फ़नो तामीर की शाहकार इमारतें पहले ही से मुतास्सुब ओहदेदारों के हाथों तबाही और बर्बादी का शिकार हैं।

इस सिलसिला में हम तारीख़ी क़ुतुब शाही मसाजिद से लेकर गुम्बदों और महलात के साथ साथ चारमीनार की मिसालें पेश कर सकते हैं हद तो ये है कि चौमहल्ला पैलेस की हालत भी दिन बा दिन ख़राब होती जा रही है ।

सियासत के एक फ़िक्रमंद क़ारी ने हमारी तवज्जा चौमहल्ला पैलेस के अक्बी दरवाज़ा के बाज़ू के दरीचों ( खिड़कियों ) की जानिब मबज़ूल करवाई ये दरीचे इस क़दर बोसीदा हो गए हैं कि कभी भी गिर सकते हैं लेकिन अफ़सोस इस जानिब कोई तवज्जा नहीं दे रहा है ।

हम ने इस सिलसिला में डायरेक्टर जी किशन राव से मिलने की कोशिश की लेकिन कहा गया कि साहब मीटिंग में है कुल फ़लां वक़्त आ जाईए । ऐसा लगता है कि साहब हमेशा मीटिंग में मसरूफ़ रहते हैं यही वजह है कि किसी को भी इन बोसीदा दरीचों पर तवज्जा देने की ज़हमत नहीं हुई ।

ऐसा महसूस होता है कि मैनेजमेंट ख़िलवत पैलेस के बाहर के हिस्सा को पलट कर देखना भी नहीं चाहता । मैनेजमेंट ने इस दरवाज़ा के करीब कोई सेक्यूरिटी गार्ड तयनात करने से भी गुरेज़ किया है जिस के बाइस लोग वहां गंदगी फैला रहे हैं ।

मुक़ामी अफ़राद और फ़िक्रमंद शहरियों का कहना है कि मैनेजमेंट सिर्फ़ चौमहल्ला की अंदरूनी सफ़ाई पर तवज्जा मर्कूज़ किए हुए है । बैरूनी दीवारों की हालत क्या है? दरीचे किस तरह बोसीदगी का शिकार हो रहे हैं? दरवाज़ों को किस अंदाज़ में तबाह किया जा रहा है? इस बारे में उसे या उस के डायरेक्टर को कोई फ़िक्र नहीं ।

कम अज़ कम सैयाहों की आमद से होने वाली आमदनी का कुछ हिस्सा दीवारों , दरवाज़ों , दरीचों की मुरम्मत और दुरूस्तगी पर सर्फ़ किया जा सकता है । आप को बतादें कि इस महल में आसिफ़ जाहि दौर के बेश बहा नवादिरात ग़ैर मामूली अहमियत और कीमत के हामिल फ़ानुस , मुसव्विरी के नादिर वो नायाब नमूने , इंतिहाई ख़ूबसूरत बर्तन और हथियार को बड़े ही सलीका से सजाकर रखा गया है ।

उम्मीद है कि इंतिज़ामीया ख़ास कर डायरेक्टर जी किशन राव इस जानिब फ़ौरी तवज्जा देंगे ।(नुमाइंदा खुसूसी)

TOPPOPULARRECENT