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छत्तीसगढ़ में हड़ताल के दौरान 50 लोगों की मौत

रायपुर : पिछले गुरुवार से प्रदेश के संजीवनी एक्सप्रेस और महतारी एक्सप्रेस के पायलट (ड्राइवर) और टेक्नीशियन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण दोनों एमरजेंसी सेवाओं के ठप हैं। नतीजतन, सही समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण प्रदेश भर में अब तक करीब 50 जानें जा चुकी हैं।
कोई हादसा होने जाय या कोई अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ जाए तो 108 नंबर पर फोन लगाकर कहीं भी एंबुलेंस (संजीवनी एक्सप्रेस) बुलाई जा सकती है। इसी तरह गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना हो तो 102 नंबर पर डायल कर महतारी एक्सप्रेस की मदद ली जा सकती है। संजीवनी एक्सप्रेस पांच सालों से और महतारी एक्सप्रेस तीन सालों से चल रही है और ये दोनों सर्विसेज सचमुच में संजीवनी साबित हुई हैं। हड़ताल के बीच ऐसे कई हादसे हुए जिसमें एंबुलेंस सर्विस मिली होती तो जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

बुधवार 8 जून को रायपुर-बिलासपुर हाईवे पर सिमगा के पास एक टीवी कैमरामैन राकेश चौहान (24) और उसकी मां की सड़क हादसे में मौत हो गई। राकेश बाइक चला रहे थे और उनकी मां पीछे बैठी थीं, तभी एक ट्रक ने उन्हें चपेट में ले लिया। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद करीब ढाई घंटे दोनों सड़क पर तड़पते रहे। इस दौरान वहां जुटे लोग 108 डायल करते रहे पर कोई एंबुलेंस नहीं आई। आखिरकार दोनों ने दम तोड़ दिया।

इसी तरह सोमवार को आरंग के पास मोखला में पिकअप पलटने पिता-बेटे की मौत हो गई। हादसे में इन दोनों के अलावा 28 लोग जख्मी थे, जिनमें आठ की हालत वहीं पड़े-पड़े बिगड़ती रही। लोगों ने 108 डायल किया। जब एंबुलेंस नहीं आई तो निजी वाहन से सबको अस्पताल पहुंचाया गया।

कभी भी बीमार पड़ने पर लोगों को संजीवनी व गर्भवती महिलाओं को 102 सेवा लेने की आदत सी पड़ गई है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि दोनों ही एंबुलेंस ठप हैं। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल मरीजों को 108 एंबुलेंस महज 29 से 25 मिनट में अस्पताल पहुंचा रही थी। इससे लाखों लोगों को सही वक्त पर इलाज मिल सका है। हड़ताल के कारण रोजाना 800 लोग प्रभावित हो रहे हैं।

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