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छत्तीसगढ़ सीआईडी करेगी डीयू, जेएनयू के प्रोफेसरों से जुड़े आदिवासी आदमी की हत्या मामले की जांच

बुधवार को छत्तीसगढ़ पुलिस ने सुकमा जिले में आदिवासी आदमी की हत्या का मामला सीआईडी को स्थानांतरित कर दिया। इस मामले में माओवादियों और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दो महिला प्रोफेसरों को आरोपी बनाया गया है।

“बस्तर पुलिस द्वारा सिफारिश किए जाने पर हमने इस मामले को राज्य सीआईडी को स्थानांतरित किया है,” छत्तीसगढ़ पुलिस महानिदेशक एएन उपाध्याय ने बताया।

पुलिस (बस्तर रेंज) के महानिरीक्षक, एसआरपी कल्लूरी ने बुधवार को डीजीपी को लिखे एक पत्र में अपराध की जांच सीआईडी द्वारा कराए जाने की सिफारिश की। आदिवासी शामनाथ बघेल की हत्या कथित तौर पर 4 नवंबर की रात को उनके पैतृक गांव नामा में सशस्त्र नक्सलियों की थी।

इस मामले में डीयू की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर, जेएनयू की प्रोफेसर अर्चना प्रसाद, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), छत्तीसगढ़ के सचिव संजय पराते, दिल्ली के जोशी अधिकारी इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल स्टडीज के विनीत तिवारी और माओवादियों समेत अन्य लोगों के खिलाफ मृत व्यक्ति की पत्नी की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है।

डीजीपी को लिखे पत्र में कल्लूरी ने कहा, “चूंकि डीयू की प्रोफेसर नंदिनी सुंदर कई मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से मेरे खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगा रही हैं, इसलिए मैं एक पारदर्शी जांच के लिए सीआईडी को इस मामले को सौंपने की सलाह देता हूँ।”

इस मामले में आरोपियों के ऊपर भारतीय दंड सहिंता की धारा 147(दंगा), 148(खतरनाक हथियारों के साथ दंगा), 149(गैर कानूनी समूह के सभी सदस्यों की एक ही अपराध में संलिप्ता), 302(हत्या), 450 (अपराध को अंजाम देने के लिए घर में घुसपैठ), 120(B)(अपराधिक साजिश) और इसके अलावा आर्म्स एक्ट और अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

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