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जज ईमानदार नहीं होगा तो दुकानदार होगा- चीफ़ जस्टिस

सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर ने छत्तीसगढ़ स्टेट ज्यूडिशियल अकादमी कांफ्रेंस में कहा कि ईमानदारी में सिर्फ जज का एकाधिकार नहीं है। जज के साथ उनके स्टाफ को भी ईमानदार होना चाहिए।

जिला न्यायालय के आदेश सुप्रीम कोर्ट तक आते हैं, इसलिए निर्णय अंग्रेजी में देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जज अपने काम को नौकरी न समझें। इसे भगवान का दिया हुआ सम्मान मानकर तपस्वी की तरह काम करें। न्यायपालिका में लोगों का भरोसा है। इस कारण जज का ईमानदार होना जरूरी है। यदि जज ईमानदार नहीं होगा तो दुकानदार हो जाएगा। रुपये लेकर न्याय बेचेगा। बेईमान होने वाले के लिए कम या ज्यादा का प्रतिशत नहीं होना चाहिए। न्यायपालिका में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। बेईमान को सीधे बाहर कर दिया जाता है। ऐसे लोगों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हिंदी हमारी मातृ भाषा है।

इसका सम्मान करना चाहिए लेकिन इसके साथ अंग्रेजी सीखने में कोई खराबी नहीं है। निचली अदालतों के आदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक आते हैं, इसलिए जजों को अंग्रेजी में आदेश लिखना चाहिए। आदेश में पर्याप्त कारण लिखा जाना चाहिए। इसके लिए न्यायाधीशों को निरंतर पढ़ना चाहिए।

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