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जज नजरबंदी के मामले में मुशर्रफ को मिली जमानत

इस्लामाबाद, 12 जून: इस्लामाबाद की एक अदालत ने जजों को नज़रबंद किए जाने के मामले में साबिक सदर परवेज़ मुशर्रफ़ की जमानत मंजूर कर ली है और उन्हें पांच लाख रुपए मुचलका जमा करने का हुक्म दिया है।

इस्लामाबाद, 12 जून: इस्लामाबाद की एक अदालत ने जजों को नज़रबंद किए जाने के मामले में साबिक सदर परवेज़ मुशर्रफ़ की जमानत मंजूर कर ली है और उन्हें पांच लाख रुपए मुचलका जमा करने का हुक्म दिया है।

जजों को नज़रबंद बंद किए जाने के मामले में सरकारी वकील का कहना है कि वो अदालत में मुल्ज़िम की जमानत की दरखास्त की मुखालिफत के लिए नहीं बल्कि इस मामले में अदालत की मदद करने के लिए आए हैं।

परवेज़ मुशर्रफ़ ने तीन नवंबर 2007 में मुल्क में इमरजेंसी लगाने के बाद चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी समेत आली अदलिया के जजों को नज़रबंद कर दिया था।

नजरबंदी के दौरान आली अदलिया (Higher Judiciary)के कुछ जजों ने गैर आइनी (Unconstitutional) करार दिए जाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अब्दुल हमीद डोगर के साथ काम करना शुरू कर दिया था, जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की हुकूमत ने सत्ता में आने के बाद चीफ जस्टिस इफ्तिखार मोहम्मद चौधरी समेत बाकी कुछ जजों की नजरबंदी खत्म कर दी थी।

जस्टिस मोहम्मद रियाज की कियादत में दो रूकनी बेंच ने साबिक फौजी सदर की जमानत की दरखास्त पर सुनवाई की।

मुशर्रफ की ओर से वकील इलियास सिद्दीकी ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मुकदमा 2009 में उस वक्त दर्ज किया गया जब वह मुल्क में मौजूद नहीं थे।

इलियास सिद्दीकी ने कहा कि मुशर्रफ ने मुल्क में इमरजेंसी उस वक्त वक़ाफी हुकूमत के कहने पर लगाई थी।

इस मामले में सरकारी वकील का कहना था कि मुल्ज़िम ने सीधे किसी जज की नजरबंदी के हुक्म तो जारी नहीं किए थे लेकिन इमरजेंसी के बाद जजों को घरों में कैद रखना ऐसा ही ख्याल होगा जैसे उनके हुक्म उस वक्त के फौजी सदर ने दिए थे।

दूसरी ओर क्वेटा में एक अदालत ने बलूच नेता नवाब अकबर बुगती कत्ल केस में साबिक फौजी सदर परवेज़ मुशर्रफ़ की जमानत की दरखास्त को खारिज कर दिया है।

मुशर्रफ बलूच नेता नवाब बुगती कत्ल के मामले में नामज़द हैं|

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