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जन्नत का बाज़ार

(कारी नजीर अहमद कादरी) हजरत सईद बिन मसीब (रह0) का बयान है कि मैंने हजरत अबू हुरैरा (रजि0) से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मैं अल्लाह तआला से सवाल करता हूं कि मुझे और तुझे जन्नत के बाजार में इकट्ठा कर देवे। हजरत सईद ने पूछा क्या जन्नत में ब

(कारी नजीर अहमद कादरी) हजरत सईद बिन मसीब (रह0) का बयान है कि मैंने हजरत अबू हुरैरा (रजि0) से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि मैं अल्लाह तआला से सवाल करता हूं कि मुझे और तुझे जन्नत के बाजार में इकट्ठा कर देवे। हजरत सईद ने पूछा क्या जन्नत में बाजार भी होगा? हजरत अबू हुरैरा (रजि0) ने फरमाया कि हां! नबी करीम (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने मुझे बताया है कि बिला शुब्हा अहले जन्नत जब जन्नत में दाखिल होंगे तो अपने अपने आमाल के मुताबिक दर्जात और मनाजिल में उतरेंगे।

इसके बाद दुनिया के दिनों में यौमे जुमा की मिकदार में उनको इजाजत दी जाएगी कि अपने रब की जियारत करें पस वह अपने परवरदिगार की जियारत करेंगे उस वक्त अल्लाह तआला अपने अर्श को ज़ाहिर फरमा देगा। अपना दीदार कराने के लिए ज़न्नत के एक बड़े बाग में जाहिर होगा (जो लोग दीदारे इलाही के लिए जमा होंगे) उनके लिए नूर के और मोतियों के, सोने के और चांदी के मिम्बर बिछाए जाएंगे (और हस्बे मरातिब) जितनी उनपर बैठेंगे नेमतों और नवाजिशों की वजह से उनमें कोई घटिया और कमतर तो न होगा लेकिन मरतबा के एतबार से जो सबसे कमतर होंगे मुश्क और जाफरान के टीलों पर बैठेंगे और यह टीलो पर बैठने वालों को अपने से बेहतर ख्याल न करेंगे( क्योंकि अगर ऐसा ख्याल आ गया कि हम घटिया हैं तो रंज होगा और जन्नत में रंज का नाम नहीं)

हजरत अबू हुरैरा (रजि0) ने अर्ज किया या रसूल (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) क्या हम अपने परवरदिगार को देखेंगे? फरमाया हां, क्या सूरज को और चैदहवीं रात को चांद को देखने में कोई शुब्हा रखते हो? हमने अर्ज किया – नहीं।

फरमाया – इसी तरह तुम अपने परवरदिगार को देखने में कोई शक न करोगे और इस मजलिस में कोई शख्स ऐसा बाकी न रहेगा जिससे आमने सामने होकर अल्लाह तआला की गुफ्तगू न हो। यहां तक कि हाजिरीन में से बाज को मुखातिब करके अल्लाह तआला फरमाएगा कि ऐ फलां के बेटे फलां क्या तुझे याद है कि फलां दिन तूने ऐसा कहा था।
याद दिलाएगा जो उस ने दुनिया में की थी।

वह शख्स अर्ज करेगा कि ऐ परवरदिगार क्या तूने मुझे बख्श नहीं दिया? अल्लाह तआला फरमाएगा- हां, मैंने बख्श दिया और मेरी बख्शिश ही की वसअत की वजह से आज तू इस मरतबे को पहुंचा है। सब लोग इसी हाल में होंगे कि एक बादल आएगा और उनपर छा जाएगा और ऐसी खुशबू बरसाएगा कि उस जैसी खुशबू उन्होंने कभी न पाई होगी।

अल्लाह तआला का इरशाद होगा- कि उठो और उस चीज की तरफ चलो जो मैंने तुम्हारे एज़ाज़ व इकराम के लिए तैयार की है और जो चीज तुम को पसंद आए उसको ले लो। फिर हम एक बाजार में आएंगे जिसको फरिश्तों ने घेर रखा होगा। उस बाजार में वह चीजें होंगी कि उन जैसी चीजों को न आंखों ने देखा न कानों ने सुना न दिलों पर उनका गुज़र हुआ बस जिस चीज को हमारा जी चाहेगा हमारे लिए उठा लिया जाएगा (और यह सब कुछ बगैर कीमत के होगा क्योंकि) वहां न बेचा जाएगा न खरीदा जाएगा।

फिर इरशाद फरमाया कि इस बाजार में जन्नती एक दूसरे से मुलाकात करेंगे। बुलंद मरतबे का (एक शख्स) किसी कम मरतबे वाले से मुलाकात करेगा। हालांकि (अपने अपने एहसास के मुताबिक उनमें कोई कमतर न होगा) तो उस शख्स को बुलंद मरतबे वाले का लिबास बहुत पसंद आ जाएगा। (लेकिन अभी उसकी बात खत्म न होने पाएगी) कि इस का लिबास उस बुलंद मरतबे वाले के लिबास से अच्छा मालूम होने लगेगा। और यह इस वजह से कि जन्नत में यह मौका नहीं रखा गया है कि कोई शख्स (जरा भी) रंजीदा हो।

उसके बाद हम अपने अपने मकानों को रवाना हो जाएंगे वहां पहुंचने पर हमारी बीवियां इस्तकबाल करेंगी और कहेंगी कि तुम उस हुस्न व जमाल को लेकर वापस हुए तो जो उस वक्त था जबकि तुम हम से जुदा हुए थे। हम जवाब में कहेंगे कि आज हमने अपने परवरदिगार के साथ हमनशीनी की इज़्ज़त हासिल की है और हम इसी शान के साथ आने के लायक हैं।

हजरत अनस (रजि0) से रिवायत है कि नबी करीम (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया कि बिला शुब्हा जन्नत में एक बाजार है जिस में जन्नती पर जुमा को जाया करेंगे। वहां शुमाली हवा चलेगी जो जन्नतियों के चेहरो और कपड़ों को खुशबू से भर देगी और उनके हुस्न व जमाल में इजाफा हो जाएगा। पस वह खूब ज्यादा हसीन व जमील होकर अपने घर वालों के पास वापस जाएंगे।

घर के लोग कहेंगे कि कसम है खुदा की हमसे जुदा होने के बाद तुम्हारा हुस्न व जमाल बढ़ गया। उसके बाद वह कहेंगे कि खुदा की कसम हमारे बाद तुम्हारे हुस्न व जमाल में भी इजाफा हो गया।

हजरत अली मुरतजा (रजि0) से रिवायत है कि नबी करीम (सल्लल्लाहू अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि बिला शुब्हा जन्नत में एक बाजार है जिसमें न खरीद है न फरोख्त है। उसमें सिर्फ मर्दों और औरतों की सूरते हैं। उनको देखकर जब कोई शख्स चाहेगा कि फलां सूरत मेरी सूरत हो जाती तो (उसी वक्त) उसकी वह सूरत बन जाएगी।

बशुक्रिया: जदीद मरकज़

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