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जब कानून सबके लिए बराबर तो मोदी राज में क्यूं नहीं है सुप्रीम कोर्ट में एक भी मुस्लिम जज

हाल ही में हुए एक सर्वे के मुताबिक़ की सुप्रीम कोर्ट में एक भी मुस्लिम जज नहीं है। आखिरी बार 2012 में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम जज की नियुक्ति की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जस्टिस एम.वाई.इकबाल और जस्टिस फकीर मोहम्मद 2012 में जज बने थे जोकि इस साल रिटायर हो गए हैं। पिछले 11 वर्षों में ऐसा पहली बार और पिछले करीब तीन दशकों में ऐसा दूसरी बार हुआ है कि देश की सुप्रीम कोर्ट में कोई मुस्लिम जज नहीं है। हालांकि कहा जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच हाईकोर्ट्स में जजों की नियुक्ति को गतिरोध के चलते काफी देरी लग रही है। गौरतलब है कि जजों की नियुक्ति में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के प्रति अपनी नाराजगी भी जाहिर की है। आपको दें कि सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जस्टिस एम. फातिमा बीवी जज भी एक मुस्लिम थीं जोकि 6 अक्टूबर 1989 से 29 अप्रैल 1992 तक सुप्रीम कोर्ट में जज थीं। सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो चुके 196 और मौजूदा 28 जजों में कुल 17 (7.5 प्रतिशत) जज मुस्लिम रहे हैं

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