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जब 40 साल बाद मिली दुकान मालिक को उसकी दुकान

नई दिल्ली: एक व्यक्ति ने 40 साल की लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद अपने दुकान को आखिरकार हासिल कर लिया है। मामला वडोदरा के अनिल कुमार ढेकले का है। ढेकले को अपनी दुकान 30 रूपए प्रतिमाह के किराए पर किया। जिसका मालिकाना हासिल करने में 4 दशक का वक्त लग गया लेकिन अनिल कुमार ढेकले ने अपनी जंग जीत है। ढेकले ने वर्ष 1958 में अपनी दुकान को 30 रुपये प्रतिमाह के किराये पर उठाया था। 1974 से 1976 तक किराया नहीं मिलने पर ढेकले ने 1978 में कोर्ट का रुख किया। 40 साल तक कोर्ट में चली लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने किराएदार को 2 महीने के अंदर दुकान को ढेकले को सौंपने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही अपनी ही संपत्ति को वापस हासिल करने के लिए इतनी लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने पर ढेकले के साथ सहानुभूति भी जताई। जस्टिस कुरियन जोसफ और आर भानुमति की पीठ ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि याचिकाकर्ता मालिक को अपनी ही संपत्ति वापस हासिल करने में 4 दशक से अधिक का वक्त लग गया। इस वजह से दुकान पर कब्जा जमाए बैठे किराएदारों को यह सख्त निर्देश दिया जाता है कि वे फौरन दुकान का अधिकार सौंप दें।’1958 में दुकान देने के बाद ढेकले को 1974 तक नियमित तौर पर किराया मिलता रहा। इसके बाद किराएदार ने 1976 तक किराया नहीं दिया। ढेकले ने कोर्ट का रुख किया, जहां 1981 में उनके पक्ष में फैसला आया। लेकिन 1983 में जिला कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया, जिसके बाद ढेकले हाईकोर्ट में गए। 2003 में गुजरात हाई कोर्ट ने जिला कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए किराएदार को मासिक किराया देते हुए दुकान पर अधिकार का फैसला दिया। ढेकले 2006 में सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए जहां पर एक दशक के बाद उन्हें राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हाईकोर्ट का फैसला तथ्यों पर आधारित नहीं है, इसलिए इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता है। किराएदार को 2 महीने के अंदर संपत्ति छोड़ने और इसे ढेकले के सुपुर्द करने का निर्देश दिया जाता है।’
खैर देर आए लेकिन दुरूस्त आए अब ढेकले को उनकी दुकान मिल गई। देश में कोर्ट केस के हालात इतने अच्छे नहीं हैं कि किसी आम आदमी को इंसाफ बिना वक्त गवाए मिल सके, इसी का नतीजा है कि आज एक मकान मालिक को अपनी ही ज़मीन पाने में 40 साल का अरसा लग गया।

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