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जमीअत ने की दलितों, आदिवासियों से अन्याय के खिलाफ एकजूट होकर लड़ने की अपील

जमीअत उलमा-ए- हिन्द के 33वीं राष्ट्रिय जनरल सेशन की सभा का आयोजन रविवार को अजमेर से 15 की.मि. की दुरी पर स्थित कायद विश्राम स्थली में किया गया। बैठक में सभी मुस्लिम फ़िरकों के नेता और ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह के कार्यवाहक भी मौजूद रहे। ख्वाहिश मोईनुद्दीन चिश्ती को ग़रीब नवाज़ के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही अजमेर दरगाह के प्रतिनिधि अंजुमन सईद ज़ादगन, प्रो. अख्तरुल वासेय, अजमेर दरगाह के पूर्व ट्रस्टी और बरेलवी फिरके के चीफ मौलाना तौक़ीर भी इस बैठक में शामिल हुए।

दूसरे धार्मिक गुरु जैसे स्वामी चिदानन्द सरस्वती, आचार्य लोकेश मुनी, पंडित एनके शर्मा और दलित प्रतिनिधि अशोक भारती जैसे लोगों ने बैठक में शामिल हो कर इसकी रौनक बढ़ाई। ऐसे समय में जहां 2014 जब से नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से सरकार मुस्लिम, दलित और आदिवासी को निशाना बनाये हुए है, वहां सभी का एक साथ एकत्र होना विविधता में एकता का प्रतीक है। जहां पहले घर वापसी, लव जिहाद, गौरक्षा एवम् बीफ पर राजनीती चल रही थी, वहीं आजकल तीन तलाक़ और सामान आचार सहिंता को सामुदायिक समानता और राष्ट्रिय एकता का मुद्दा बनाया हुआ है।

इस बैठक में एक नेता ने मुस्लिम दलित और आदिवासियों को अन्याय के खिलाफ एकजुट होने पर ज़ोर दिया और कहा की राष्ट्रीय एकता के लिए मुसलमानो को सभी तबकों के लोगों के साथ मिल जुल कर रहना होगा। मौलाना नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी ने जमीअत का प्रस्ताव पढ़ते हुआ कहा की जमीअत सामजिक अन्याय के खिलाफ दलित और आदिवासियों को मिला कर लड़ाई लड़ेगी। अजमेर के अधिसूचना के अंतर्गत केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए यह कहा कि यदि सरकार सामान आचार संहिता देश में लागु करेगी तो वो सीधे सीधे हमारे पर्सनल लॉ में दखल होगा और हम लोग स्वतंत्र नागरिक नहीं रह जायेंगे। आगे इस अधिसूचना में तीन तलाक़ की भी आलोचना की गयी और मुसलमान भाइयों से अपील की गयी की इस परम्परा को खत्म किया जाये।

वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद बढ़ती साम्प्रदायिक घटनाओं की और इशारा करते हुए जमीअत उलेमा-ए-हिन्द के सेक्रेट्ररी जनरल मौलाना मदनी ने कहा कि जमीअत ने पूर्व सरकार साम्प्रदायिक विरोध में कानून बनाने का दबाव डाला था लेकिन सरकार ने इस प्रस्ताव पर ध्यान ही नहीं दिया था। प्रस्ताव में आगे बताया गया है कि जमीअत सामुदायिक समानता को देश की सुरक्षा और एकता के लिए पहली शर्त मानती है। साम्प्रदायिक दंगे राष्ट्र के लिए एक काले धब्बे के समान है और देश के विकास में बाधक हैं। सरकार की पहली ज़िम्मेदारी देश में शांति और सुरक्षा का माहौल बनाये रखना है। इसलिए आज जमीअत केंद्र एवं प्रदेश सरकार से साम्प्रदायिक विरोधी कानून लागू करने की अपील करती है।

इस प्रस्ताव में मुसलमानो के विभिन्न जगहों पर काम होते प्रदर्शनों पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी और साथ ही मुसलमानो को स्तिथी सुधारने के लिए कुछ मांगे भी की। जमीअत के प्रेसिडेंट मौलाना मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी ने लोगों को संबोधित करते हुए खास कर मुसलमानो के फ़िरक़ों के बीच की असमानता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हमे सभी फ़िरक़ों और असमानताओं को भुला कर देश की शांति और समुदाय से जुड़े मुद्दों के लिए एक मंच पर आये। पहले भी मौलाना उस्मान ने मुसलमानो को चेतावनी दी थी कि मुस्लिमों के फ़िरक़ों की असमानता हमारे देश और मुस्लिम दुनिया के लिए हानि का कारण बन सकती हैं।

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