Friday , October 20 2017
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जम्मू-ओ-कश्मीर की सहाफ़त पर तन्क़ीद , सहाफ़ीयों की तर्बीयत की तजवीज़

जम्मू-ओ-कश्मीर के सालसों ने ज़राए इबलाग़ के किरदार पर तन्क़ीद (Notice/समीक्षा) की और कहा कि रियासत के सहाफ़ी सयासी खेल के लिए मदाख़िलती वाक़ियात तख़लीक़ (पैदा) कर रहे हैं। उन्होंने तजवीज़ (विचार/राय) पेश की कि इन सहाफ़ीयों को ख़बरों की इशाअत (

जम्मू-ओ-कश्मीर के सालसों ने ज़राए इबलाग़ के किरदार पर तन्क़ीद (Notice/समीक्षा) की और कहा कि रियासत के सहाफ़ी सयासी खेल के लिए मदाख़िलती वाक़ियात तख़लीक़ (पैदा) कर रहे हैं। उन्होंने तजवीज़ (विचार/राय) पेश की कि इन सहाफ़ीयों को ख़बरों की इशाअत (प्रकाशन/publication) और तहरीरों में महारत बेहतर बनाने के लिए मुख़्तसर मुद्दती तर्बीयत (प्रशिक्षण/Training) देनी चाहीए। रिपोर्ट में कहा गया है कि ज़राए इबलाग़ का किरदार भी बेहद पेचीदा है और मुसबत अमन की ताईद की एहमीयत को ग़लत ब्यानी के ज़रीया कम करके पेश किया जा रहा है।

चंद मुट्ठी भर अख़बारी नुमाइंदे और इलेक्ट्रॉनिक मीडीया के ऐंकर (Anchor/समाचार उद्घोषक) जिन का ताल्लुक़ ( संबंध) क़ौमी ज़राए इबलाग़ से है, तसादुम (जंहा अक्सर लड़ाई होती है) के इलाक़ों के बारे में ख़बरों को कम एहमीयत देते हैं , इन का रुजहान(रूची/ झुकाव) तशद्दुद (ज़ुल्म/ अत्याचार) के बारे में नक़ल-ओ-हरकत पर मर्कूज़ होता है।

मुक़ामी ज़राए इबलाग़ इस के बरअक्स (विपरीत) अमन कार्रवाई की तब्दीलीयों पर ज़्यादा तवज्जा ( ध्यान) देते हैं। इस रुजहान में तब्दीली (परीवर्तन/ बदलाव) की ज़रूरत है।

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