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जयललिता को कर्नाटक हाईकोर्ट से नही मिली जमानत

आमदनी से ज़्यादा दौलत जमा करने के मामले में चार साल की सजा पाने वाली अन्नाद्रमुक चीफ जे जयललिता को कर्नाटक हाईकोर्ट से आज फिर राहत नहीं मिली और इस अदालत ने उनकी जमानत की दरखास्त खारिज कर दी|जयललिता अब इस फैसले को शायद आज सुप्रीम कोर

आमदनी से ज़्यादा दौलत जमा करने के मामले में चार साल की सजा पाने वाली अन्नाद्रमुक चीफ जे जयललिता को कर्नाटक हाईकोर्ट से आज फिर राहत नहीं मिली और इस अदालत ने उनकी जमानत की दरखास्त खारिज कर दी|जयललिता अब इस फैसले को शायद आज सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती हैं|

खचाखच भरे अदालत में अपना फैसला सुनाते हुए जस्टिस एवी चंद्रशेखर ने कहा कि जमानत देने की ‘‘कोई बुनियाद नहीं’’ है| उन्होंने कहा कि बदउनवानी से ‘‘इंसानू हुकूक की खिलाफवर्जी होती है’’ और इससे इक्तेसादी अदम तवाज़ुन पैदा होता है| अदालत का फैसला जयललिता और उनके हामियों समर्थकों के लिए झटका है|

इससे पहले, Special Public Prosecutor भवानी सिंह ने अदालत से कहा कि उन्हें जयललिता को कंडिशनल जमानत दिये जाने पर कोई ऐतराज़ नहीं है|

आमदनी से ज़्यादा दौलत मामले में विशेष खुसूसी अदालत ने 27 सितंबर को जयललिता को गुनाहगार ठहराया था. इसके बाद से ही वह यहां की जेल में बंद हैं|

स्पेशल पब्लिक प्रासीक्यूटर का रूख मालूम चलने के बाद, परप्पाना अग्रहारा जेल के पास और अदालत के बाहर जमा अन्नाद्रमुक के हामी उनकी रिहाई का अ‍अम्दाज़ा लगाकर जश्न मनाने लगे और उन्होंने पटाखे चलाए|

लेकिन उनका जश्न ज्यादा देर तक जारी नहीं रहा| जब फैसला सुनाया गया, तो उन्हें इस पर भरोसा नहीं हुआ और वहां मौजूद ख्वातीन मातम करने लगीं जबकि मर्द नारेबाजी करते हुए जमीन पर लेट गये|

इस फैसले के खिलाफ जयललिता के सुप्रीम कोर्ट जाने के बारे में पूछे जाने पर जयललिता की ओर से पेश सीनीयर वकील राम जेठमलानी ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरा मुवक्किल (मुस्तकबिल के बारे में) फैसला करेगा|’’

हालांकि जयललिता के एक दूसरे वकील ने कहा कि उनके पास बुध या फिर जुमेरात के रोज़ सुप्रीम कोर्ट की पनाह में जाने के अलावा कोई आप्शन नहीं है|

अदालत ने जयललिता की करीबी शशिकला और उनके रिश्तेदारों, मुंह बोला बेटा वीएन सुधाकरण और इलावरासी की जमानत की दरखास्त भी खारिज कर दीं| इन लोगों को भी 18 साल पुराने मामले में चार चार साल की सजा हुई है|

जेठमलानी ने चारा घोटाले में बिहार के साबिक वज़ीर ए आला लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई राहत वाले फैसले का हवाला देते हुए अपनी दलीलों में 66 साला जयललिता को फौरन जमानत दिये जाने की पुरजोर अपील की|

हालांकि अदालत ने जेठमलानी की दलीलें कुबूल नहीं की| जज ने कहा कि लालू प्रसाद ने आली अदालत की तरफ से जमानत मंजूर किये जाने से पहले जेल में 10 महीने गुजारे थे|

जेठमलानी ने इससे पहले जयललिता को चार साल के कारावास की सजा सुनाने वाली खुसूसी अदालत की सजा पर रोक लगाने की भी गुजारिश की |जेठमलानी ने ताज़ीरात ए हिंद की दफा 389 के तहत अपील ज़ेर ए गौर रहने तक सजा पर रोक लगाने की गुजारिश की.जेठमलानी ने जस्टिस चंद्रशेखर से कहा कि ‘‘बाकायदा रिवायत’’ जमानत देने की है|

अवकाशपीठ ने एक अक्तूबर को यह मामला कल के लिए मुल्तवि किया था | जेठमलानी ने कहा कि अपील पर मुंतकी मुद्दत (Logical time period) में सुनवाई होनी चाहिए|

सीनीयर वकील ने 66 . 65 करोड़ रूपये के आमदनी से ज़्यादा दौलत के मामले में खुसूसी अदालत के फैसले की तन्कीद करते हुए कहा कि (जयललिता के सीएम रहते हुए) साल 1991 और 1996 के बीच के वक्त से पहले की प्रापर्टी को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता|

उन्होंने कहा कि जयललिता के तर्ज़ ए अमल के बारे में ऐसा कुछ भी खुलासा नहीं हुआ है कि वह फरार हो सकती हैं|

शशिकला, सुधाकरण और इलावरासी की ओर से पेश वकील अमित देसाई ने अदालत से कहा कि किसी भी गवाह ने इन तीनों की तरफ से दौलत जमा करने की बात नहीं कही और श‍क सबूत की जगह नहीं ले सकता|

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