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“जय हिंद” कहने पर फौज ने मौलवी को थमाया नोटिस

फौज ने "जय हिंद" कहने पर मौलवी को नोटिस थमाया है। नोटिस मे कहा गया है कि वह जय हिंद की बजाए फौज मे सरकारी तौर पर कहे जाने वाले "राम राम" और "जय माता दी" का इस्तेमाल करे।

फौज ने “जय हिंद” कहने पर मौलवी को नोटिस थमाया है। नोटिस मे कहा गया है कि वह जय हिंद की बजाए फौज मे सरकारी तौर पर कहे जाने वाले “राम राम” और “जय माता दी” का इस्तेमाल करे।

इस पर सूबेदार इशरत अली ने इल्ज़ाम लगाते हुए कहा है कि उसे कमान आफीसर ने उसे नोटिस जारी कर वार्निंग दी है की वह राम राम या जय माता दी बोलकर सैल्यूट करे। ऐसा नहीं करने पर उसके खिलाफ इंतेज़ामी कार्रवाई की जाएगी।

एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक , इशरत अली ने इसके एहतिजाज में सदर जम्हूरिया प्रणब मुखर्जी, उत्तर प्रदेश के वज़ीर ए आला अखिलेश यादव और अक्लीयती कमीशन को खत लिखे हैं।

अली ने बताया कि मैंने उन्हें इत्तेला कर दिया है कि वह उक्त सैल्यूट का इस्तेमाल नहीं कर सकता है क्योंकि हिंदू मज़हबी बोल हैं और वह मुस्लिम मज़हब का उस्ताद है।

अली की तरफ से उसकी बीवी शहनाज बानो ने सदर जम्हूरिया और दिल्ली वाके कौमी अक्लियती कमीशन को शिकायत की है। खत की एक कॉपी उत्तर प्रदेश के वज़ीर ए आला अखिलेश यादव को भी भेजी गई है। खत में कहा गया है कि अली को उक्त सैल्यूट /सलूट का इस्तेमाल कहने के सबब उन्हें ज़हनी टार्चर (Mental torture) झेलनी पड़ रही है। इसलिए, उन्हें इस मामले में इंसाफ दिलवाया जाए।

हालांकि, अली के कमान आफीसर चित्रा सेन ने इस मामले में यह कहते हुए कुछ भी बोलने से मना कर दिया की मामले की सारी जानकारी आर्मी हेडक्वार्टर के पास है। फौज मुकम्मल तौर पर सेक्युलर है। वहीं आवामी राबिता के इजाफी जनरल डायरेक्टर मेजर जनरल शौकीन चौहान ने कहा कि हम जय हिंद और सभी तरह के सैल्यूट/सलूटों का एहतेराम करते हैं। उन्होंने भी अली की शिकायत पर ज्यादा कुछ बोलने से मना कर दिया।

Border Security Force से असिस्टेंट कमांडेट के ओहदा से मुद्दत से पहले रिटायरमेंट लेने वाले जाने माने वकील राजीव आनंद ने सुबेदार अली को दिए नोटिस पर नाराजगी जाहिर की है। ऐसा नोटिस देना गलत है। सैल्यूट मुल्क के लिए दिए जाते हैं, न की मज़हब के नाम पर। फौजी, फौजी होता है। वे किसी मज़हब से नहीं जुड़े होते हैं। इस तरह के नोटिस देना सही नहीं है।

नोटिस में सुबेदार अली से कहा गया है कि वह अपने सैल्यूट करने के तरीके को बदले। फौज में मज़हबी रहनुमा का काम जवानों में इत्तेहाद, जोश और हुब्बल वतनी को जगाना होता है, जबकि जय हिंद (लोंग लिव इंडिया) मज़हबी कीना और बुनियाद परस्ती का पैगाम देता है। अगर आप इस तरह की ज़हनियत से ऊपर नहीं उठे और राम राम व जय माता दी जैसे सैल्यूटों का इस्तेमाल बटालियन के नियमों के तहत नहीं किया गया तो आपके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नोटिस में आगे कहा गया है कि आप एक मज़हबी टीचर हैं और आपका काम जवानों में मुल्क की मुहब्बत , जोश और इत्तेहाद को जगाना होता है। आपका काम (जय हिंद) सिर्फ मज़हबी कीना और बुनिय परस्ती का पैगाम ही नहीं भेजता, बल्कि इससे पता चलता है कि आपको मालूमात कम है। इसे बर्दाशत नहीं किया जाएगा।

वहीं, सुबेदार अली ने कहा कि अपनी 22 साल की नौकरी उसे कभी भी जय हिंद लफ्ज़ का इस्तेमाल करने के लिए कभी भी मना नहीं किया गया। मुझे जुलाई में ज़ुबानी तौर पर कहा गया था कि अगर मैंने राम राम या जय माता दी इस्तेमाल करना शुरू नहीं किया गया तो मेरा कोर्ट मार्शल कर दिया जाएगा।

अली ने कहा कि मैं पिछले 22 साल से फौज में नौकरी कर रहा हूं और मैंने जनरल वी के सिंह समेत कई फौजी सरबराह को जय हिंद कहते हुए सैल्यूट किया है, लेकिन किसी ने इसपर ऐतराज़ नहीं जताया। जय हिंद हुब्बल वतनी का इशारा है। हुब्बल वतनी होने पर मैं गलत कैसे हो सकता हूं।

अली ने दावा किया की सात महीने सुडान में स्पेशल ड्यूटी करके मैं जब मई में मुल्क वापस लौटा तो मुझे इस बात को लेकर परेशान किया जाने लगा।

अली के मुताबिक, मुझे इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि मुझसे जूनियर मौलवी को सुडान भेज दिया गया था, जिसे लेकर मैंने शिकायत की थी। मैं दस साल से राजपूताना राइफल्स के सेंटर में नौकरी कर रहा था। लेकिन, शिकायत करने पर मेरा तबादला राजस्थान के बीकानेर कर दिया गया।

“मेरी शिकायत के बाद मुझे फौरन सूडान भेज दिया गया था। हालांकि, मेरे वापस मुल्क लौटने पर मेरा फौरन बीकानेर तबादला कर दिया गया।”

अली ने आगे कहा कि मैंने अपने तबादले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में दरखास्त दायर की है। दरखास्त में कहा है कि मेरी बीवी की तबीयत ठीक नहीं है। वह दिल की मरीज है और उसका इलाज चल रहा है। मेरी सिर्फ दो साल की और नौकरी बची है। मेरी दोनों बेटियां और बेटा दिल्ली में पढ़ रहे हैं इसलिए मुझे यहीं रहने दिया जाए।

देरी के सबब उनका शुरूआती मामला खारिज कर दिया गया था, लेकिन उनकी दुबारा दी हुई दरखास्त दिल्ली हाई कोर्ट में ज़ेर ए गौर है। अली ने कहा कि 17 अगस्त को मैंने अपनी रिपोर्ट पर दस्तखत करने से इसलिए मना कर दिया था क्योंकि वह जबरन बिगाड़ दी गई थी। इसी मामले में उन्हें दूसरा नोटिस दिया गया था।

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