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जर्मनी: अदालती कार्यवाही के दौरान “नक़ाब” पर प्रतिबंध की मांग

बावेरिया: जर्मनी के दक्षिण प्रांत बावेरिया सरकार ने कहा है कि देश भर में होने वाली न्यायिक कार्यों में किसी महिला के चेहरे को पूरी तरह से छिपाने का निषेध होना चाहिए।

समाचार एजेंसी डी पी ए ने बावेरिया की प्रांतीय सरकार के हवाले से बताया है कि अदालती कार्यवाही के दौरान किसी को अपना चेहरा छिपा नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे न्यायिक कार्रवाई के प्रभावित होने की संभावना हो सकती हैं।जर्मन राजनीतिक पार्टी क्रिश्चियन सोशल यूनियन (सी एस यू) राजनीतिज्ञ मार्सेल ह्यूबर के अनुसार इस प्रस्ताव का उद्देश्य दरअसल देश में बुर्का पर प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि इसे लागू केवल अदालतों में करने के प्रस्ताव पर चर्चा है।

बावेरिया के दफ़्तर कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, ” यह कोई धार्मिक या व्यक्तिगत मामला नहीं है। हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि अदालती कार्यवाही को कानूनी दायरे में रखा जा सके। ”इस बयान के अनुसार न्यायिक कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण है कि गवाही देने वाले व्यक्ति के चेहरे के भाव को पूर्ण और व्यापक रूप से समीक्षा की जा सके।

हाल ही में म्यूनिख में एक महिला ने अदालती कार्रवाई के दौरान गवाही देते हुए घूंघट हटाने से इनकार कर दिया था। तब जज ने इस महिला को अनुमति दे दी थी कि वह घूंघट के साथ ही अपना बयान लिखाए।

उस अदालती कार्रवाई के दौरान महिला ने अपना चेहरा अपनी प्रतिद्वंद्वी पार्टी को दिखाया था लेकिन कोई दूसरा उसका चेहरा नहीं देख सकता था।जर्मनी में अदालती कार्यवाही के दौरान गवाहों के लिए कोई ‘ड्रेस कोड नहीं है। हालांकि न्यायाधीश को अधिकार है कि वह इस संबंध में मांग कर सकता है।

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