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जर्मनी के दोबारा इत्तिहाद की 25वीं सालगिरा

जर्मनी के दोबारा इत्तिहाद के पच्चीस बरस मुकम्मल होने पर जर्मनी को आज यूरोप की सबसे बड़ी इक़्तेसादीयात और आलमी सतह पर एक बाअसर मुल्क की हैसियत हासिल हो चुकी है। साबिक़ा मग़रिबी और मशरिक़ी जर्मनी का इत्तिहाद तीन अक्तूबर सन 1990 को हुआ था।

इत्तिहाद के बाद से जर्मनी के कम्युनिस्ट हिस्से की तरक़्क़ी और तामीर के लिए अब तक तक़रीबन दो ट्रीलियन डॉलर ख़र्च किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी रक़म मशरिक़ी हिस्से के शहरों और क़स्बात की ताअमीरे नव के साथ साथ क़दीम सनअत को अपग्रेड करने पर ख़र्च की गई है। सुनके बाद मशरिक़ी इलाक़े से लोग बड़ी तादाद में मग़रिबी हिस्से की तरफ़ रुख करने लगे।

वहीं सन 2013 में मग़रिबी से मशरिक़ी हिस्से में जाने वाले शहरीयों की तादाद मुक़ाबलतन ज़्यादा देखी गई। एक ताज़ा जायज़े के मुताबिक़ अब जर्मनी के मग़रिबी इलाक़े के लोग बड़े फ़ख़र के साथ मशरिक़ी हिस्से की तरफ़ काम काज के सिलसिले में मुंतक़िल होने के इलावा वहां छुट्टियां गुज़ारने भी जाते हैं।

जरमनी के मशरिक़ी इलाक़े में शरह बेरोज़गारी अभी भी मग़रिबी हिस्से के मुक़ाबले में ज़्यादा है। दोनों हिस्सों के दरमयान बेरोज़गारी का फ़र्क़ बतदरीज कम होता चला जा रहा है।

इत्तिहाद के वक़्त के जर्मन चांसलर हेलमूट कोहल ने मशरिक़ी हिस्से के जर्मनों से वाअदा किया था कि वो बहुत जल्द एक पुर वक़ार ज़िंदगी की शुरूआत करने वाले हैं और ये दौर की बात नहीं। कोहल ने जो उस वक़्त कहा था, वो अब दरुस्त साबित हो चुका है।

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