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जल्लीकट्टू के बाद भैंसा दौड़ ‘कंबाला’ से भी बैन हटाने की मांग, सरकार कानून संशोधन को तैयार

जल्लीकट्टू के बाद अब भैंसा दौड़ कंबाला से बैन हटाने की मांग तेज हो रही है। कंबाला पर चल रहे प्रदर्शन के बीच कर्नाटक की कैबिनेट ने रविवार को पशु निर्दयता विरोधी कानून में संशोधन करने का फैसला किया। इस संसोधन के बाद इस पारंपरिक खेल को फिर से शुरू करने का रास्ता साफ हो जाएगा।

राज्य के कानून और संसदीय कार्य मंत्री टी. बी. जयचंद्र ने बताया कि कैबिनेट ने 6 फरवरी से 10 फरवरी तक प्रस्तावित विधानसभा के सत्र में इस मसौदा विधेयक को पेश करने का फैसला किया है। इसके कंबाला और बैलगाड़ी की दौड़ की अनुमति दी जाएगी।

गौरतलब है कि कंबाला तटीय क्षेत्र में सालाना आयोजित होने वाला एक पारंपरिक भैंसा दौड़ है। बैलगाड़ी की दौड़ उत्तरी कर्नाटक और कंबाला उडुपी-दक्षिणी कर्नाटक का पारंपरिक खेल रहा है। यह फैसला ऐसे समय पर आया जब तमिलनाडु में जल्लीकट्टू आंदोलन के चलते सरकार दबाव में आ गई। जल्लीकट्टू आंदोलन के सफलता के बाद छात्रों, कलाकारों और नेताओं ने विशाल प्रदर्शन करते हुए कंबाला से भी प्रतिबंध हटाने की मांग की है।

वहीं कंबाला को समर्थन करने वाले लोगों ने पशु अधिकार संगठन ‘पेटा’ पर आरोप लगाया कि वह कंबाला को गलत रूप में पेश कर रहा है। पेटा का दावा है कि इस खेल से भैंसों पर निर्दयता की जाती है, जबकि समर्थकों का कहना है कि ऐसा नहीं है।

 

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