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जल्लीकट्टू पर काटजू ने कहा, जानवरों के साथ जहां तक क्रूरता की बात है तब तो मछली पकड़ना भी क्रूरता है

जल्लीकट्टू विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि भारत विभिन्नताओं वाला देश है और इसे एकजुट रखने के लिए देश के सभी परपंराओं और भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए।

बीबीसी के एक कार्यक्रम में बात करते हुए उन्होंने कहा कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक परंपरागत खेल है जो सैकड़ों सालों से चला आ रहा है। अगर इस खेल में कुछ क्रूरता होती है, जैसे जानवर के आंख में मिर्ची रगड़ना, दुम काट देना या शराब पिलाना, तो इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए। वरना यह एक खेल है, इसमें क्या हर्ज़ है? उन्होंने कहा कि इसमें जानवर को मारा नहीं जाता है जैसाकि स्पेन में ‘बुल फाइटिंग’ के दौरान जानवर को मारा जाता है।

काटजू ने कहा कि जहां तक क्रूरता की बात है अगर आप मछली पकड़ते हैं तो उसमें भी क्रूरता है। आप मछली को पानी के बाहर निकालेंगे, जिससे वो हवा में सांस नहीं ले सकती और तड़प-तड़प कर मर जाती है, तो क्या मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। इसके आग उन्होंने कहा कि बहुत से लोग हलाल मीट खाते हैं जिसमें जानवर की गर्दन धीरे-धीरे काटी जाती है, तो क्या मीट और खासकर हलाल मीट तो प्रतिबंदित कर देना चाहिए।

उसके बाद उन्होंने तर्क दिया कि घुड़सवारी के दौरान घोड़े को तेज़ दौड़ाने के लिए उसके पेट में मारी जाती है और घोड़े को रोकने के लिए उसके मुंह में लोहे की लगाम डाली जाती है, तो क्या ये घोड़े के प्रति क्रूरता नहीं हुई। इसी तरह आप जब कुत्ते को ट्रेनिंग देते हैं तो भी कुछ क्रूरता होती है। इसी तरह हर जानवर के साथ कुछ न कुछ क्रूरता तो होती ही है। वरना आप जानवरों से दूर रहिए। हालांकि काटजू ने इस बात को माना कि जानवरों के साथ जिस प्रकार से कुछ मामलों में अत्यंत क्रूरता होती है वह ठीक नहीं है और ऐसा नहीं होना चाहिए। काटजू ने कहा कि जानवर कोई इंसान नहीं है इसलिए आप जानवर को इंसान के बराबर नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि जल्लीकट्टू तमिलनाडु में पोंगल त्योहार के दौरान सांड़ों के साथ होने वाला पारंपरिक एक खेल है। इसमें सांड़ों के सींग में पैसों से भारा कपड़ा बाधा जाता है। जो व्यक्ति उस कपड़े को सांड़ के सींग से निकाल लाता है उसे इनाम दिया जाता है। इस खेल पर सुप्रीम कोर्ट ने मई 2009 में एक याचिका की सुनवाई करते हुए रोक लगा दी थी। अभी इसको लेकर पूरे तमिनाडु में विरोध प्रदर्शन चले हैं और राज्य सरकार ने प्रतिबंधित करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलवाने के लिए एक अध्यादेश लाई है। इस अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी भेजा गया है।

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