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जश्न मिलादउननबी के मौक़े पर इस्लामी तालीमात की तब्लीग़ की ज़रूरत

हैदराबाद,21जनवरी, जशन‍ ए‍ ईद मिलादउननबी (pbuh) के मौक़े पर हमें दीगर अब्ना-ए-वतन को तालीमात मुहम्मदी से वाक़िफ़ करवाने की ज़रूरत है ताकि दीगर अब्ना-ए-वतन भी दीन इस्लाम की तालीमात से वाक़िफ़ होते हुए दीनी हक़ की हक़्क़ानियत को तस्लीम करें। जन

हैदराबाद,21जनवरी, जशन‍ ए‍ ईद मिलादउननबी (pbuh) के मौक़े पर हमें दीगर अब्ना-ए-वतन को तालीमात मुहम्मदी से वाक़िफ़ करवाने की ज़रूरत है ताकि दीगर अब्ना-ए-वतन भी दीन इस्लाम की तालीमात से वाक़िफ़ होते हुए दीनी हक़ की हक़्क़ानियत को तस्लीम करें। जनाब ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर सियासत ने आज अहलयान मुहल्ला वनसथली पुरम की तरफ से मुनाक़िदा मिलादउननबी कनवेनशन बउनवान नबी अकरम (pbuh)और इस्लाम बराए अमन-ओ-इंसाफ़ से ख़िताब के दौरान इन ख़्यालात का इज़हार किया।

उन्होंने बताया कि हम दीगर मज़ाहिब के मानने वालों को नजरअंदाज़ करते हुए इस बात को फ़रामोश कररहे हैं कि अल्लाह रब्बुलइज़्ज़त‌ रब्बुलआलमीन है और नबी करीम (pbuh)रहमतुल्लिलआलमीन हैं। उन्होंने बताया कि जब तक हम अपने दीने इस्लाम से वाक़िफ़ करवाने की ज़िम्मेदारी पूरी नहीं करते उस वक़्त तक हम किसी के ताल्लुक़ से बदगुमानी भी नहीं करसकते।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने जश्न मिलादउननबी के मौक़े पर इसराफ़ से गुरेज़ का अह्द करने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि अगर उम्मते मुस्लिमा सिर्फ़ इसराफ़ से गुरेज़ करने लग जाये तो मुसलमानों की तालीमी-ओ-मआशी हालत बेहतर होसकती है। उन्होंने बताया कि अगर उम्मते मुस्लिमा ईद मिलादउननबी (pbuh)के मौक़े पर बुराईयों के ख़ातमे का अह्द करना शुरू करे तो अंदरून दस्ता बारह साल मिल्लत-ए-इस्लामीया में फ़ी ज़माना मौजूद तमाम बुराईयां ख़त्म होजाएंगी।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने बताया कि हैदराबाद में तर्के तालीम का रुजूहान तशवीशनाक हद तक बढ़ता जा रहा है जिस की बुनियादी वजह मआशी कमज़ोरी है। इन मआशी कमज़ोरीयों के बावजूद हम इसराफ़ से गुरेज़ नहीं कररहे हैं जिस के नतीजे में अपना विक़ार को चुके हैं। उन्होंने मिल्लते इस्लामीया के तालीमी, मआशी, समाजी विक़ार की बहाली के लिए इक़दामात को नागुज़ीर क़रार देते हुए कहा कि हमें इस मुल्क में दुसरे अब्ना-ए-वतन के साथ दोस्ताना ताल्लुक़ात उस्तिवार करते हुए अपने हुक़ूक़ हासिल करने चाहीए।

उन्होंने बताया कि हिन्दुस्तान एक एसा मुल्क है जहां पर कई मज़ाहिब के मान्ने वाले मौजूद हैं और मुसलमान एक बड़ी तादाद में इस मुल्क में बस्ते हैं जिन्हें अपने वजूद को तस्लीम करवाने के लिए ये ज़रूरी है कि वो अपनी ज़बान और तहज़ीब का तहफ़्फ़ुज़ करें। एडीटर सियासत ने बताया कि हिन्दुस्तान जैसे ख़ुशनुमा गुलदस्ता में मुनाफ़िरत फैलाने की कोशिशें कई मर्तबा होती रही हैं और हर मर्तबा मुसलमानों ने इन कोशिशों को नाकाम बनाया है और मुस्तक़बिल में भी शरपसंदों की इस तरह की कोशिशें नाकाम होती रहेंगी।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ां ने बताया कि सिर्फ़ शहर हैदराबाद में ज़ाइद अज़ 30 हज़ार लड़कीयां बिन ब्याही हैं जिस की बुनियादी वजह कमज़ोर मआशी हालात हैं। उन्होंने बताया कि हमें एक दूसरे की मदद और ख़िदमतेख‌ल्क़ के जज़बे को फ़रोग़ देते हुए इंसानियत के पैग़ाम को आम करना चाहीए। मौलाना हाफ़िज़ पिर शब्बीर अहमद रुकन क़ानूनसाज़ कौंसिल -ओ-सदर जमईयतुल उलामा-ए-हिंद आंध्र प्रदेश ने इस मौक़े पर अपने ख़िताब के दौरान बताया कि मुसलमान जज़बातीयत से बालातर होकर हक़ायक़ को तस्लीम करें और दीगर मज़ाहिब के मान्ने वालों के सामने दीने इस्लाम का हक़ अमन-ओ-इंसाफ़ पर मुबनी पैग़ाम पेश करें।

उन्होंने बताया कि हज़रत ख़्वाजा ग़रीबनवाज़ रहमतुल्लाह‌ अलैहि के एक दौरा में लाखों लोग मुसलमान हुआ करते थे जिस की बुनियादी वजह आप‌ का मुतशर्रे होना है। लोग सिर्फ़ उन्हें देख कर हलक़ाबगोश इस्लाम होजाया करते थे, उन्हें दावत देने की ज़रूरत भी नहीं पेश आती थी। मौलाना हाफ़िज़ पपिर शब्बीर अहमद ने बताया कि इस्लाम ने इब्तेदा से ही दीनी हक़ की बुनियादों में अमन-ओ-इंसाफ़ को फ़रोग़ दिया है।

उन्होंने बताया कि दीने इस्लाम हमारी पैदाइश से मौत तक के हर शोबा में रहनुमाई करता है जबकि ख़ुद मुस्लमान जो इस्लाम के मान्ने वाले हैं इस्लाम को बदनाम करने के मूजिब बिन रहे हैं। मुस्लमानों को चाहीए कि वो क़ुरआन-ओ-हदीस से रहनुमाई हासिल करते हुए अपनी ज़िंदगीयों को दीनी हक़ के मुताबिक़ गुज़ारें ताकि दीगर मज़ाहिब के मान्ने वालों को इस बात का अंदाज़ा हो कि मुस्लमान कैसे होते हैं।

मौलाना हाफ़िज़ पैर शब्बीर अहमद ने बतायाकि इस्लाम ने जो मुसावात का दरस दिया है उस की मिसाल कोई और मज़हब में नहीं मिल सकती। उन्होंने अहलयान वनसथली पूरम की जानिब से मुनाक़िदा इस जलसे को कारआमद क़रार देते हुए कहा कि इस तरह के बयान मज़हबी जलसों के ज़रीये दीनी हक़ की दावत को आम किया जा सकता है। ई राजिंदर फ़्लोर लीडर तेलंगाना राष़्ट्रा समीती ने इस मौक़े पर अपने ख़िताब के दौरान कहा कि मुल्क में मुस्लमानों की समाजी, मआशी-ओ-तालीमी हालत इंतिहाई अबतर होती जा रही है जिस की बुनियादी वजह हुकूमतों की जानिब से मुस्लिम तबक़ा के साथ की गई नाइंसाफ़ीयां हैं।

उन्हों ने सच्चर कमेटी के हवाले से बताया कि सच्चर कमेटी ने कई हक़ायक़ मंज़रे आम पर लाए हैं जबकि इन हक़ायक़ के मंज़रे आम पर आने के बावजूद कोई इक़दामात पसमांदगी को दूर करने के लिए नहीं किए गए। उन्होंने बताया कि अलहदा रियासत तेलंगाना में मुसलमानों का मौक़िफ़ मज़बूत होगा। ई राजिंदर ने दीन इस्लाम को अमन का गहवारा क़रार देते हुए कहा कि बाअज़ लोगों की हरकतों को मज़हब से जोड़ना दरुस्त नहीं है इसी लिए किसी की बुराई को इस के मज़हब से जोड़ कर दिला ज़ारी नहीं की जानी चाहीए।

जनाब आसिफ़ उद्दीन मुहम्मद ने इस मौक़े पर अपने ख़िताब के दौरान नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात और दीगर मज़ाहिब के मानने वालों के हमराह सुलूक पर मुबनी तफ़सीली तक़रीर की। मौलाना हाफ़िज़ अबरारुल-हक़ सिद्दीक़ी क़ासिमी ने इस मौक़े पर अपने ख़िताब के दौरान बताया कि अल्लाह तआला की ज़ात सब से बड़ी है जिस ने एक लाख से ज़ाइद पैग़म्बरों को दुनिया में क़ियाम अमन के लिए भेजा।

उन्होंने बताया कि ख़ालिक़े कायनात ने नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के ज़रीये जो दस्तूर बशकल क़ुरआन हम तक पहुंचाया है इस पर अमल आवरी हमारी दुनियावी-ओ-उखरवी तरक़्क़ी की ज़ामिन है। इस मौक़े पर जोगेंद्र सिंह, डी सुधीर रेड्डी रुकन एसेम्बली जय राज शेखर रेड्डी, ऐम राम मोहन गौड़, के वेंकटेश गौड़, जनाब मुहम्मद अनवर ख़ान के अलावा जनाब आज़म-ओ-दीगर ने मुख़ातब किया। जोगेंद्र सिंह मजराल ने इस मौक़े पर अपने ख़िताब के दौरान कहा कि जब उन के वालिद हैदराबाद मुंतक़िल हुए तो उन्होंने यहां की तहज़ीब-ओ-तमद्दुन को पसंद करते हुए यहीं रहने को तर्जीह दी जिस के नतीजे में आज वो हैदराबाद में हैं।

उन्होंने बताया कि हैदराबाद में रहते हुए उन्होंने मुस्लिम अहबाब से जो तालीमात मज़हबे इस्लाम में देखी हैं उन से वो बहुत ज़्यादा मुतास्सिर हैं। उन्होंने नमाज़ के दौरान एक ही सफ़ में अमीर-ओ-ग़रीब के खड़े होने और ज़कात के उसूलों की सताइश करते हुए कहा कि वो नबी आखिरुज़्ज़मां हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात का मुताला कररहे हैं और उन से बेहद मुतास्सिर हैं।

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