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जस्टिस काटजू का उर्दू विरासत कारवाँ क़ाबिल-ए-सिताइश

कामा रेड्डी 22 अप्रैल: ( फैक्स ) अफ़्साना निगार -ओ-सदर अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू जनाब रहीम अनवर ने एक सहाफ़ती बयान में साबिक़ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट जनाब मारकंडे काटजू जो अब प्रेस कौंसिल आफ़ इंडिया के चेयरमेन के फ़राइज़ बहुस्न-ओ-ख़ूबी निभा रहे हैं।

समाजी और फ़लाही कामों में भी भरपूर हिस्सा ले रहे हैं, उर्दू की ख़िदमत के तौर पर उन्होंने फ़रोग़ उर्दू के लिए विरासत कारवाँ निकाल कर मुल्क के बड़े शहरों का दौरा किया जो काबिल-ए-सिताइश है।

वो ना सिर्फ़ फ़आल और सरगर्म हैं बल्कि सेकूलर क़ौमी यकजहती के अलमबरदार हैं और वो एक अहम‌ शख़्सियत भी हैं। इस तरह की सोच-ओ-फ़िक्र रखने वाले इंसान ना सिर्फ़ सेकूलर होते हैं बल्कि क़ाबिल-ए-एहतिराम होते हैं उन्हें उर्दू जुबान के तहफ़्फ़ुज़-ओ-तरक़्क़ी के लिए इक़दामात करने चाहिए ताकि उर्दू जुबान की अपनी इन्फ़िरादियत बरक़रार रह सके।

उन का उर्दू शायरी से लगाव‌ और जुबान से दिलचस्पी इस बात को ज़ाहिर करती है कि उर्दू जुबान को फ़रोग़ तरक़्क़ी और वुसअत(फैलाव) देने में ना सिर्फ़ मुस्लमानों ने बल्कि दीगर मज़ाहिब के लोगों ने भी नाक़ाबिल फ़रामोश ख़िदमात अंजाम दी हैं।

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