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जस्टिस सरदार अली ख़ां के इंतिक़ाल पर मुशीर आबाद में ताज़ियती इजलास का इनइक़ाद

हैदराबाद २‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍५नवंबर : जस्टिस सरदार अली ख़ान का ताज़ियती इजलास मुशयरा बाद ज़मिस्ताँ पर में मुनाक़िद हुआ जिस को कांग्रेस तेलगुदेशम इंसाफ़ क़ाइदीन के इलावा समाजी कारकुनों ने ख़िताब किया। सदर तंज़ीम इंसाफ़ मुशयरा बा

हैदराबाद २‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍‍५नवंबर : जस्टिस सरदार अली ख़ान का ताज़ियती इजलास मुशयरा बाद ज़मिस्ताँ पर में मुनाक़िद हुआ जिस को कांग्रेस तेलगुदेशम इंसाफ़ क़ाइदीन के इलावा समाजी कारकुनों ने ख़िताब किया। सदर तंज़ीम इंसाफ़ मुशयरा बाद जनाब सय्यद अली उद्दीन अहमद असद ने कहा कि एक अज़ीम सैकूलर और सोशलिस्ट नज़रियात के ज़बरदस्त हामी शख़्सियत के इंतिक़ाल से सैकूलर अवाम का नुक़्सान हुआ है।

जनाब ऐस एन आरिफ़ नस्रती ने कहा कि मरहूम जस्टिस सरदार अली ख़ान बेपनाह ख़ूबीयों के मालिक थी। सयासी, समाजी, अदबी, तहज़ीबी, इलमी सरगर्मीयों पर गहिरी नज़र रखते थी। जनाब सय्यद आलिम निज़ामी ने कहा कि जस्टिस सरदार अली ख़ान ने ख़ुद अपने आप में कई अंजुमनों तंज़ीमों के रूह रवां थी। जनाब सय्यद अमीर मुहम्मद अमजद ने क़रारदाद का मतन पेश किया।

जिस में ट्रस्टी बोर्ड महदवीह कलब मुशयरा बाद से मुतालिबा किया गया कि वो मर्कज़ी अंजुमन महदवीह चंचल गौड़ा के साथ महदवीह कलब मुशयरा बाद में उन के नाम से एक इलमी तहक़ीक़ी हाल तामीर करे ताकि क़ौम की जानिब से उन की ख़िदमात का एतराफ़ किया जा सके ।

जनाब सय्यद हमीद उद्दीन अहमद महमूद ने जस्टिस सरदार अली ख़ान की इंसानियत के लिए की गई ख़िदमात बिलख़सूस हक़ूक़-ए-इंसानी के लिए मुलक और बैरून-ए-मुल्क ख़िदमात को नाक़ाबिल फ़रामोश क़रार दिया।

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