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ज़ी सलाम पर रमज़ान की ब‌हार

रहमत , ख़ैर-ओ-बरकत , मग़फ़िरत , बख़शिश और गुनाहों से पाक साफ़ होने का सुनहरा ज़रीया और शानदार मौक़ा है । माहे रमसान । हमारी ख़ुशक़िसमती है कि हमें ज़िंदगी में एक बार फिर रब‌ से ख़ास रेहम‌ हासिल करने का पाक महीना हा हुआ । ख़ुदाए बुज़ुर्ग-ओ-बरतर ने रमज़ान की फ़ज़ीलत बयान करते हुए क़ुरआन शरीफ में तमाम मर्द-ओ-ज़न से फ़रमाया कि तुम पर रोज़े फ़र्ज़ किए गए हैं जैसे तुम से पहले वालों पर फ़र्ज़ किए गए थे ताकि तुम परहेज़गार और मुत्तक़ी बन जाव‌ , तुम में तक़वा पैदा हो ।

इस माह की इसी फ़ज़ीलत को नज़र में रखते हुए ज़ी सलाम एक बार फिर अपने प्यारे नाज़रीन के लिये लेकर आया है रहमतों की ब‌हार , सहरी से तरावीह तक होगी ज़ी सलाम पर बरकतों की बरसात । ज़ी सलाम की हर पेशकश पर साफ़ देखेगी । रमज़ान की रौनक , जहां माहे रमसान में दरस क़ुरआन की पेशकश से नाज़रीन सवाब दारेन से मालामाल होंगे वहीं दरें हदीस में रमज़ान उल-मुबारक की ख़ास फ़ज़ीलत बयान की जाएगी ।

अलग अलग शहरों से रमज़ान की रौनक , मस्जिद और इबादतगाहों की तारीख के साथ साथ हम नाज़रीन को बराह-ए-रास्त मिलवाएं गे ख़ास रोज़े दारों से और इसी प्रोग्राम के दौरान रोज़े दारों के सवालात का जवाब देंगे मलिक के जाने माने उल्मा किराम , रमज़ान मैगज़ीन में ख़ास पकवान के साथ साथ खरीदारी और रमज़ान में खाने पीने के अंदाज़ और एहतियात से भी रोज़े दारों को वाक़िफ़ कराएगा ।

ज़ी सलाम , जहान निसवां में माहे स्याम के दौरान मस्तूरात के मसाइल पर होगा तबादला ख़्याल जो ख़वातीन के लिये बहुत अहम होगा । खाना ख़ज़ाना से भी फूटेगी रमज़ान के ख़ास पकवान की ख़ुशबू , अपने नाज़रीन को दिन भर की हलचल का हाल सुनाएगा । सलाम आज , रमज़ान की रूख‌ तरावीह का भी होगा ।

बराह-ए-रास्त नशरिया , शब के आख़िरी हिस्से में प्रोग्राम रमज़ान मुबारक में हम उलमाए किराम की तक़रीर से मुस्तफ़ीद करेंगे अपने नाज़रीन को , और रात ढलते ढलते मक्का से लाईव नशरियात देख कर रोज़ेदार सवाब से भर लेंगे अपनी झोली । इस के
अलावा सलाम महफ़िल और क़व्वाली में भी फ़ज़ीलतों वाले इस माहे मुबारक के फ़ज़ाइल बयान किए जाएंगे और सुबह सुबह नाज़रीन को ज़ी सलाम पर सुनाई देगी ।

सहरी की सदा और उन सब के साथ रमज़ान के ख़ास मौखे पर वारिस बैग की रुहानी आवाज़ में पेश होगी ख़ूबसूरत हमद-ओ-नाअत । रमज़ान उल-मुबारक की मुबारक रातें , मुबारक दिन और रहमतों भरे लमहात बड़े कीमती हैं । क्यों ना हम सब उन मुबारक साअतों को अपने दामन में ज़ी सलाम के ज़रीया समेट लें , क्या पता आइन्दा हमें रमज़ान शरीफ नसीब होया ना हो । ज़ी सलाम की अपने तमाम नाज़रीन के हक़ में यही दुआ और रब से इल्तिजा है कि हमारी इन क़लील इबादतों को तो क़बूल फ़र्मा और ज़ी सलाम की तोफ़ेक़ात में मज़ीद इज़ाफ़ा कर ।।

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