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ज़ू में गाडियो की दाख़िला फ़ीस में इज़ाफ़ा पर ग़ौर

हैदराबाद १०नवंबर (सियासत न्यूज़) नहरू ज़्वालोजीकल पार्क में गाड़ियां अंदर लाने नाज़रीन की हौसला शिकनी करने हुक्काम गाड़ीयों के दाख़िला की फ़ीस में इज़ाफ़ा पर ग़ौर कररहे हैं। उस वक़्त कारों के दाख़िला पर 750 रुपय वसूल किए जाते हैं

हैदराबाद १०नवंबर (सियासत न्यूज़) नहरू ज़्वालोजीकल पार्क में गाड़ियां अंदर लाने नाज़रीन की हौसला शिकनी करने हुक्काम गाड़ीयों के दाख़िला की फ़ीस में इज़ाफ़ा पर ग़ौर कररहे हैं। उस वक़्त कारों के दाख़िला पर 750 रुपय वसूल किए जाते हैं जिस में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा किया जा सकता है, हत्ता कि इस रक़म को दोगुना भी किया जा सकता ही। ये इक़दाम ज़ौक़े अहाता में गाड़ीयों के घूमने से फैलने वाली आलूदगी और इस के जानवरों और परिन्दों पर पड़ने वाले असरात के ख़तरात के पेशे नज़र किया जा रहा है।

नहरू ज़्वालोजीकल पार्क में यौमिया औसतन 80 ता 100 कारें दाख़िला लेती हैं और इतवार और तातीलात में ये तादाद बढ़ कर 300 तक पहुंच जाती ही। हुक्काम के लिए ना सिर्फ़ अहाता में घूमने वाली गाड़ीयों के धोईं से माहौल की फ़िज़ा-ए-में पैदा होने वाली आलूदगी ही नहीं बल्कि इन गाड़ीयों से पैदा होने वाले शोर से फैलने वाली सूती आलूदगी भी बाइस तशवीश ही। एक ओहदेदार ने बताया कि कारें चलाने वाले जब हॉर्न बजाते हैं और अपनी गाड़ीयों में ऊंची आवाज़ में मूसीक़ी बजाते हैं तो जानवरों और परिन्दों के लिए बेहतर नहीं होता।

इसी वजह से फ़ीस में इज़ाफ़ा करते हुए ज़ौ में कारों के दाख़िला की हौसला शिकनी करने पर ग़ौर कर रहे हैं। डायरैक्टर आफ़ स्टेट ज़ोस मिस्टर पी मल्लिकार्जुन राउ ने बताया कि आज से दो साल क़बल ज़ौ में कारों की दाख़िला फ़ीस 200 रुपय थी जिस में पहली मर्तबा इज़ाफ़ा करते हुए 500 रुपय किया गया और फिर इस में मज़ीद इज़ाफ़ा करते हुए 750 रुपय कर दिया गया। उन्हों ने बताया कि कारों के दाख़िला फ़ीस पर नज़र-ए-सानी करने का मसला ज़ेर-ए-ग़ौर है और बहुत जल्द इस ख़सूस में फ़ैसला किया जाएगा।

ज़ौ क़े हुक्काम बयाटरी से चलने वाली अपनी गाड़ीयों की तादाद में इज़ाफ़ा की कार्रवाई कररहे हैं। ज़ौ में उस वक़्त ऐसी 11 गाड़ियां हैं। क्यूरेटर मिस्टर शंकरण ने बताया कि ये गाड़ियां 14 निशस्ती हैं जो हर रोज़ ज़ौ की 80 ता 100 गशत करती हैं ताहम इतवार और तातिलात में ये नाकाफ़ी साबित होती हैं, हमें मुतबादिल(अदल बदल करना) को मुस्तहकम करना होगा और मज़ीद बैटरी से चलाई जाने वाली गाड़ीयों की तादाद में इज़ाफ़ा करना होगा ताकि शायक़ीन अपनी गाड़ीयों को ज़ू क़े बाहर पार्क करके बयाटरी से चलने वाली इन बसों में घूमते हुए सैर कर सकें। ज़ौ फ़ी घंटा 20 रुपय की फ़ीस पर 50 बाइसीकलस भी फ़राहम करता है जिन की ज़बरदस्त मांग ही। मिस्टर शंकरण ने बताया कि हम ने 20 बाइसीकलस से आग़ाज़ किया था और तलब को देखते हुए इस में इज़ाफ़ा किया।

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