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जाकिर नाइक पर पनामा पेपर्स से जुड़े होने का आरोप, ED करेगा जांच

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस्लामिक स्कॉलर डॉ जाकिर नाइक के संस्थान इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (IRF) को मिले 200 करोड़ रुपये के स्रोतों की जांच कर रहा है. ईडी के अधिकारी पनामा पेपर्स के खुलासे में फंसे वाहिदना ग्रुप के साथ जाकिर नाइक के संबंधों की जांच कर रहा है.

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इंडिया टुडे के अनुसार, ED को इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के खातों में 200 करोड़ रुपये के जमा होने के सबूत मिले हैं. इनमें से 70 करोड़ रुपये हार्मनी मीडिया नाम की प्रोडक्शन कंपनी के नाम पर जमा हुए हैं. बाकी रकम नाइक ने खुद जमा करवाई है. वीडियो और टीवी सॉफ्टवेयर प्रोडक्शन हाउस का मालिक होने के साथ ही जाकिर नाइक और उनकी पत्नी मार्च 2013 तक लॉन्गलास्ट कंस्ट्रक्शन और राइट प्रॉपर्टी सोल्यूशन्स नाम की 2 कंपनियों के प्रमोटर और डायरेक्टर थे. लॉन्सलास्ट कंस्ट्रक्शन को वाहिदना ग्रुप की ओर से 9 करोड़ रुपये का लोन मिला था. हालांकि नाइक ने ये लोन लौटा दिये थे.
बता दें कि वाहिदना कंपनी को अल्ताफ और अरशद नाम के दो भाई चलाते हैं. अरशद का नाम पनामा पेपर्स में शामिल है. इसी बुनियाद पर ED ने यह जांच शुरू की है. अल्ताफ का बयान भी ED के अधिकारियों ने दर्ज कर लिया है.

जाकिर नाइक को तीसरी बार सामान भेजा गया है. इन दिनों वह साउदी अरब में हैं. तीसरी सामान की एक कॉपी उनके बड़े भाई मोहम्मद नाइक को भी भेजी गई है. नाइक को ये समन मेल के जरिये भेजा गया है.
उल्लेखनीय है की जाकिर नाइक के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अब तक 5-6 लोगों से पूछताछ की गई है. जल्द ही उन की बहन को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. पूछताछ किये गए लोगों में उनके बड़े भाई मोहम्मद नाइक और IRF के कुछ कर्मचारियों के अलावा जाकिर के कानूनी सलाहकार शौकत जमाती भी शामिल हैं.
आप को बता दें कि पनामा पेपर पनामा (एक अमेरिकी देश) स्थित मोसेक फॉन्सेका नामक विधि फर्म के वो दस्तावेज हैं जो निवेशकों को कर बचाने, काले पैसे को सफेद करने और अन्य गैर कानूनी गतिविधि से जुड़े हैं.

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