Wednesday , August 23 2017
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जाति के नाम पर फूट पैदा करने पर प्रधानमंत्री को आपत्ति

नई दिल्ली: दलितों के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजनेताओं सहित अपनी पार्टी नेताओं से कहा कि ग़ैर दाराना बयानों से बाज आ, और यह शिकायत की कि दलित समुदाय के स्वयंभू चैम्पियन तनाव पैदा करने के लिए सामाजिक समस्याओं को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह दलितों और अन्य दबे कुचले वर्गों के कल्याण के कार्यकाल के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन कुछ लोगों को यह बात हजम नहीं हो रही है कि नरेंद्र मोदी अनुसार दलित जाएं। उन्होंने दलितों के खिलाफ हिंसा की निंदा की और कहा कि यह किसी भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है।

प्रधानमंत्री ने सीएनएन। समाचार 18 को दिए गए विशेष साक्षात्कार में कहा कि सभी नेताओं सहित भाजपा नेताओं पर स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ गैर जिम्मेदाराना बयानों से बचें ताकि राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और समानता प्रभावित न हो सकें और हमें संवेदनशील मुद्दों पर सावधानी से काम लेने की जरूरत है। यह इंगित करते हुए कि देश भर में भाजपा के कई अरका संसद और विधानसभा हैं उन्होंने कहा कि मैं जब डॉ बी आर अंबेडकर की 125 वीं जयंती समारोहों की शुरूआत की है कुछ लोग यह महसूस कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी, डॉ अंबेडकर के अनुयायी (नही मानता) हो गए हैं और वे समस्याएं पैदा करने लगे हैं।

ये दावा करते हुए कि वह दलितों, दबे कुचले वर्गों, कबाईलों और महिलाओं के कल्याण के कार्यकाल के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों (नेताओं) को नागवार गुज़र रहा है और मेरे खिलाफ निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं। किसी का नाम लिए बिना नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो लोग जाति के नाम पर देश में घृणा फैला रहे हैं उन्हें चाहिए कि सामाजिक मुद्दों को राजनीतिक रंग देने से बचें। प्रधानमंत्री ने कहा कि दलितों के खिलाफ किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं होनी चाहिए जबकि देश को हमारे विकास एजेंडा पर पूरा विश्वास है। उन्होंने बताया कि जनता में कोई कलह और उलझन नहीं है लेकिन जो लोग नहीं चाहते कि एक कार्करद, सक्रिय और पारदर्शी सरकार स्थापित हो, और जो लोग पूर्ववर्ती सरकार से जुड़े रहना चाहते हैं उन्हें हमारी सरकार से समस्या हो रही हैं। चूंकि हमारा एजेंडा विकास है बदस्तूर जारी रहेगा यह कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं बल्कि मेरा अटूट यक़ीन है, अगर देश को गरीबी से निजात दिलाना है तो विकास पर ध्यान देने और गरीबों को अधिकार दिए जाने की जरूरत है।

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