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जानबूझकर शफीकुर्रहमान ने किया “वंदेमातरम” का बायकाट

नई दिल्ली, 9 मई: बसपा एमपी डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने बुध के दिन लोकसभा सेशन के इख्तेताम के दौरान कौमी गीत (राष्‍ट्र गीत) वंदेमातरम् का बायकाट जानबूझकर किया था।

नई दिल्ली, 9 मई: बसपा एमपी डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने बुध के दिन लोकसभा सेशन के इख्तेताम के दौरान कौमी गीत (राष्‍ट्र गीत) वंदेमातरम् का बायकाट जानबूझकर किया था।

उनका कहना है कि व‌ह मुल्क के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं, लेकिन जहां मामला इस्लाम का है तो वहां समझौता नहीं कर सकते।

डॉ. बर्क ने कहा कि वह कौमी तराना (राष्ट्रगान) ‘जन गण मन’ का एहतेराम करते हैं। वह कौमी तराना पूरे एहतराम के साथ करते हैं लेकिन वंदेमातरम् गीत इस्लाम के मुताल्लिक नहीं है। इसलिए लोकसभा में जब वंदेमातरम् के लिए सभी खड़े हुए तो वह उसे बीच में छोड़कर चले गए।

उन्होंने कहा कि लोकसभा की नुमाइंदगी की मुद्दत में यह दूसरा मौका था, जब उनके सामने वंदेमातरम् गाया गया। पहली बार 1997 में जब लोकसभा की गोल्डन जुबली के दौरान गीत ( वंदेमातरम) गाया गया था तो उन्होंने इसे इस्लाम के बरअक्श बताते हुए एहतिजाज किया था। और दूसरी मर्तबा उन्होंने इसका बायकाट कर दिया।

गौरतलब है कि बुध के दिन लोकसभा के सेशन के इख्तेताम के दौरान डॉ. स्फीकुर्रहमान ने कौमी गीत का बायकाट किया था जिस पर लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने उन्हें मुस्तकबिल ( Future) में ऐसा न करने की हिदायत दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स वक्त डॉ. बर्क ने राष्‍ट्र गीत का बायकाट करने के पीछे पेट खराब होने का बहाना बनाया था।

कौमी गीत के लिए नहीं है कानून

वंदे मातरम की तौहीन को लेकर मुल्क में कोई नियम-कानून नहीं है। यह अलग बात है कि इस कौमी गीत को कौमी तराना जन-गण-मन की तरह एजाज याफ्ता और आइनी दर्जा हासिल है, लेकिन इसके लिए कोई प्रोटोकॉल नहीं हैं।

पिछले दिनों एक आरटीआई में वज़ारत ए दाखिला ने यह जानकारी दी थी। साफ है कि वंदे मातरम को जन-गण-मन के बराबर का दर्जा सिर्फ कागजी है। अमली सूरत कुछ और है। ऐसे में वंदे मातरम की तौहीन करने वाले एमपी बर्क को कोई सजा नहीं होगी।

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