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जानिए क्या है गुजरात दंगों का चेहरा बने ये दो लोगों की सच्चाई..

गुजरात: साल 2002 के गुजरात दंगों में सिर पर भगवा कपड़ा बाँध और हाथ में रोड लिए हिंसा का चेहरा बने अशोक परमार उर्फ अशोक मोची और असहाय हालात में हाथ जोड़कर बेबस और लाचारी का चेहरा बने कुतुबुद्दीन अंसारी की वायरल हुई तस्वीर की सच्चाई कुछ और ही कहती है।

असल में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सामने आया कि न तो अशोक आरोपी है और न ही अंसारी पीड़ित। गोधराकांड के बाद गुजरात में भड़के दंगों में अशोक की तस्वीर सामने आने के बाद वह गुजरात में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ घृणा का प्रतीक बन गए थे। लेकिन जो तस्वीर में दिखाई दे रहा है वह सच नहीं है।

इस के पीछे की सच्चाई अशोक ने खुद लोगों से शेयर की और कहा की मेरा इस उस हिंसा से लेना-देना नहीं है। दरअसल कैमरे में कैद हुई मेरी वो तस्वीर में मैंने गलत जगह गलत एक्सप्रेशन दे दिए। मुझसे उस तरह से पोज देने को कहा गया था और इस तस्वीर ने इन दंगों में आरोपी न होते हुए भी मुझे दंगों का चेहरा बना दिया।

ऐसा ही कुछ पेशे से टेलर कुतुबुद्दीन अंसारी के साथ हुआ। उन्होंने बताया की मेरी यह तस्वीर तब खींची गई जब मैं वह रैपिड ऐक्शन फोर्स के जवानों से रखियल एरिया में अपने परिवार को बचाने की अपील कर रहा था। हालाँकि मेरा मेरा परिवार तो बच गया लेकिन मुझे दंगा पीड़ित मुसलामानों का चेहरा बना दिया गया।

उस दौरान अंसारी गुजरात छोड़ पश्चिम बंगाल की सरकार द्वारा दिए गए निमंत्रण के तहत कोलकाता चले गए थे लेकिन 2005 में वह परिवार समेत अहमदाबाद वापस लौट आए और अब छोटी सी अपनी एक दुकान चलाते हैं।

आपको बता दें की अंसारी की इस तस्वीर का साल 2008 के सीरियल ब्लास्ट के बाद आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन ने गलत तरीके से इस्तेमाल किया था।इसके बाद साल 2014 में अशोक और अंसारी ने एक एनजीओ के मदद से आयोजित एक समारोह में एकता और सामाजिक समरसता का संदेश देने के लिए एक साथ आये और अशोक ने अंसारी की बायोग्रफी रिलीज की।

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