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जामिआ निज़ामीया का इस्तिहकाम, वक़्त का तक़ाज़ा मुफ़्ती ख़लील अहमद का ख़िताब

हैदराबाद 31 अक्टूबर (प्रैस नोट) मुफ़क्किरे इस्लाम मौलाना मुफ़्ती ख़लील अहमद शेख़ उलजा मआ ने जामिआ निज़ामीया में ज़िम्मा दारान ज़ेली मराकज़-ओ-कारकुनान चर्म क़ुर्बानी के इजतिमा से ख़िताब करते हुए कहाकि आज दुनिया भर में इस्लाम दुश्मनी पर मब

हैदराबाद 31 अक्टूबर (प्रैस नोट) मुफ़क्किरे इस्लाम मौलाना मुफ़्ती ख़लील अहमद शेख़ उलजा मआ ने जामिआ निज़ामीया में ज़िम्मा दारान ज़ेली मराकज़-ओ-कारकुनान चर्म क़ुर्बानी के इजतिमा से ख़िताब करते हुए कहाकि आज दुनिया भर में इस्लाम दुश्मनी पर मबनी प्रोग्राम तर्तीब दिया जा रहा है और मुस्लमानों के ईमान को कमज़ोर करने की साज़िशें की जा रही हैं। मुल्क में लाज़िमी तालीमी ऐक्ट के नाम से एक क़ानून मुदव्वन किया गया है जिस के शराइत क़वाइद ख़तरनाक और मदारिस दयनीय के लिए तबाहकुन हैं।

उन्हों ने कहाकि जामिआ निज़ामीया मुल़्क की मुख़्तलिफ़ रियास्तों में अपने मुल्हिक़ा मदारिस के जाल को फैलाता जा रहा है ताकि उलूम इस्लामीया की तरवीज-ओ-इशाअत के साथ साथ असलम दुश्मन प्रोग्रामों का मोस्सर मुक़ाबला किया जा सकी। मौलाना मुफ़्ती ख़लील अहमद ने कहाकि मज़हबी टी वी चिया नल, अख़बारात या देनी रसाइल दावत दीन का एक ज़रीया हैं जबकि दीनी मदारिस उल्मा की तैय्यारी के मराकज़ हैं।

जामिआ निज़ामीया 140 साल से मुतय्यन मक़ासिद के साथ पूरी आब-ओ-ताब से कारकरद है। जामिआ निज़ामीया और कलीৃ अलबनात जामिआ निज़ामीया मैं तलबा-ए-ओ- तालिबात की तादाद 2000 से ज़ाइद है। मौलाना मुहम्मद ख़्वाजा शरीफ़ शेख़ अलहदीस जामिआ निज़ामीया ने कहाकि हज़रत-ए-शैख़ उल-इस्लाम ने हुकूमत आसफ़िया में बड़े मंसब पर फ़ाइज़ होने के बावजूद जामिआ को सिर्फ सरकारी इमदाद के बजाय क़ौम-ओ-मिल्लत के अतयात से चलाया है।

आज भी अर्बाब जामिआ इसी तरीक़ा पर गामज़न हैं और जामिआ के तमाम काज़ अस्हाब ख़ैर के तआवुन से तकमील पाते हैं। हज़रत-ए-शैख़ अलहदीस ने कहाकि जामिआ निज़ामीया ख़ित्ता दक्कन के लिए मादर इलमी के मुमासिल है। इस इलाक़ा में जितने मदारिस क़ायम हैं वो सब जामिआ निज़ामीया के फ़ैज़ान का नतीजा है। इस तरह दक्कन भर में मुक़र्ररीन, वाअज़ीन, अइम्मा, ख़ुत्बा-ए-और मोज़नीन वग़ैरा से लोग जो इस्तिफ़ादा करते हैं वो दरहक़ीक़त बिलवासता तौर पर जामिआ निज़ामीया से इस्तिफ़ादा है।

मौलाना डाक्टर मुहम्मद सैफ-उल्लाह शेख़ अलादब जामिआ निज़ामीया ने कहाकि जामिआ इलम और रूहानियत का शहर है इस इदारा को किसी फ़र्द ने अपनी फ़िक्र से क़ायम नहीं किया बल्कि रसूल अकरम सिल्ली अल्लाह इला-ओ-सल्लम ने अपने हुक्म से क़ायम फ़रमाया है। मौलाना ने कहाकि जिस घर में क़ुर्बानी होती है इस घर के सारे मसाइब दूर होजाते हैं वो घर शैतानी असरात से पाक होजाता है। उन्हों ने अह्ले ख़ैर से तआवुन की अपील की। मौलाना हाफ़िज़ मुहम्मद अबैदुल्लाह फ़हीम मुंतज़िम जामिआ निज़ामीया ने इंतिज़ामात की निगरानी की।

मौलाना क़ाज़ी सय्यद लतीफ़ अली कादरी और मौलाना सय्यद शाह नेअमत अल्लाह कादरी ने मेहमानों का इस्तिक़बाल किया। हज़रत-ए-शैख़ इलजा मआ-ओ-हज़रत-ए-शैख़ अलहदीस ने ज़िम्मा दारान ज़ेली मराकज़ को जामिआ निज़ामीया के नोतामीर शूदा-ओ-ज़र-ए-तामीर इमारतों का मुआइना करवाया।

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