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जावेद उस्मानी यूपी के चीफ सेक्रेट्री

उत्तरप्रदेश के चीफ़ मिनिस्टर अखिलेश यादव ने कमान सँभालते ही आला आफ़िसरान के तबादले और उनकी जगह नए आफ़िसरान/अफस्रान की तक़र्रुरी का फ़ैसला और ऐलान शुरू कर दिया है। इस सिलसिला में उन्होंने चीफ़ सेक्रेटरी के ओहदे पर जावेद उसमानी का इंते

उत्तरप्रदेश के चीफ़ मिनिस्टर अखिलेश यादव ने कमान सँभालते ही आला आफ़िसरान के तबादले और उनकी जगह नए आफ़िसरान/अफस्रान की तक़र्रुरी का फ़ैसला और ऐलान शुरू कर दिया है। इस सिलसिला में उन्होंने चीफ़ सेक्रेटरी के ओहदे पर जावेद उसमानी का इंतेख़ाब किया है।

उत्तर प्रदेश की तारीख़ में काफ़ी अर्से के बाद, उसमानी पहले मुस्लिम अफ़्सर हैं जिनको चीफ़ सेक्रेटरी के ओहदे पर तैनात किया गया है। बताया जाता है कि इससे क़ब्ल 1975-76 में आई ए एस अफ़्सर महमूद बट भी चीफ़ सेक्रेटरी रह चुके हैं। मंसूबा बंदी कमीशन में सेक्रेटरी बनाए गए उसमानी ने अभी ओहदे की ज़िम्मेदारी नहीं सँभाली थी कि रियास्ती हुकूमत ने इन को चीफ़ सेक्रेटरी बनाने की तजवीज़ पेश कर दी।

1978 एच के आई ए एस अफ़्सर जावेद उस्मानी का नाम हलफ़ बर्दारी से क़ब्ल ही चीफ़ सेक्रेटरी के लिए मौज़ू बहस बना हुआ था। वर्ल्ड बैंक के लिए अपनी ख़िदमात पेश करने ओले जावेद उसमानी को अभी जल्द ही मंसूबा बंदी कमीशन का सेक्रेटरी बनाया गया था जहां उन्होंने चार्ज भी नहीं सँभाला था।

तक़र्रुरी से क़ब्ल उनकी डीपवीशन की मुद्दत ख़त्म करने की ख़ाना पूरी करने के बाद चीफ़ सैक्रेटरी के ओहदे पर बाक़ायदा फ़ाइज़ किया जाएगा। जावेद उसमानी, गोरखपोर और बुलंदशहर के ज़िला मजिस्ट्रेट रहने के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के चांसलर भी रहे। मुलायम सिंह के भरोसा मंद अफ़्सर की हैसियत से वो 1993 से 1995 तक वज़ीर-ए-आला के सैक्रेटरी रहे। इस के बाद मुलाइम के दूसरे दौर-ए-इक्तदार में इन को प्रिंसिपल सैक्रेटरी का ओहदा सौंपा गया था। उन्होंने आलमी बैंक के लिए भी अपनी ख़िदमात पेश कीं।

वाज़िह रहे कि उसमानी आइ आइ एम, अहमदाबाद से वाबस्ता रहे और लंदन स्कूल आफ़ इकानॉमिक्स से सोशल पालिसी ऐंड प्लानिंग की तालीम हासिल की। मनमोहन सिंह के जारी दौर-ए-इक्तदार में अब से कुछ अर्सा क़ब्ल वो दफ़्तर वज़ारत-ए-उज़मा में जवाइंट सेक्रेटरी के ओहदे पर भी फ़ाइज़ रहे। इस से क़ब्ल वाजपाई और आई के गुजराल के दौर-ए-इक्तदार में वज़ारत-ए-उज़मा से वाबस्ता रहे।

जावेद उसमानी आई ए एस का इम्कान नाप करने वाले इन मादूदे चंद मुस्लमानों में से एक हैं, जिन्होंने मुल़्क की सबसे बड़ी अक़ल्लीयत का सर फ़ख़र से बुलंद कर दिया था। जावेद उसमानी ने 1978 में नाम किया था जबकि उनके बाद बिहार के आमिर सुबहानी ने 1987 में और कश्मीर के शाह फ़ैसल ने अभी हाल में 2010 आई ए एस के पुरविक़ार इम्तेहान में अव्वल पोज़ीशन हासिल की थी। 2001 में बिहार की शहला निगार ने ऑल इंडिया लेवल पर दूसरा जबकि लड़कीयों में पहला मुक़ाम हासिल किया था।

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