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जासूसी मामला: मोदी के साथ खातून की तस्वीर जारी

खोजी वेबसाइट गुलेल डॉट कॉम ने गुजरात के साबिक वज़ीर ए दाखिला अमित शाह की तरफ से मुअत्तल आइपीएस आफीसर जीएल सिंघल को 'साहेब' के कहने पर माधुरी (बदला हुआ नाम) की निगरानी का हुक्म देने से मुताल्लिक टेप जारी किए जाने के बाद अब गुजरात के वज़

खोजी वेबसाइट गुलेल डॉट कॉम ने गुजरात के साबिक वज़ीर ए दाखिला अमित शाह की तरफ से मुअत्तल आइपीएस आफीसर जीएल सिंघल को ‘साहेब’ के कहने पर माधुरी (बदला हुआ नाम) की निगरानी का हुक्म देने से मुताल्लिक टेप जारी किए जाने के बाद अब गुजरात के वज़ीर ए आला नरेंद्र मोदी के साथ खातून की कुछ तस्वीरें जारी की हैं। वेबसाइट ने दावा किया है कि इसमें जो खातून दिख रही है उसी की गैरकानूनी तरीके से निगरानी करवाई गई थी। वेबसाइट के मुताबिक मोदी माधुरी को 2005 से जानते थे।

गुलेल ने अक्टूबर 2005 की कच्छ की कई तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में मोदी एक खातून के साथ दिख रहे हैं। इनमें से एक तस्वीर में आइएएस आफीसर प्रदीप शर्मा मौजूद हैं।

इन तस्वीरों से माधुरी के वालिद प्रेमलाल सोनी और बीजेपी की सफाई पर संगीन सवाल उठते हैं जिसमें कहा गया है कि प्रेमलाल के कहने पर ही उसकी निगरानी कराई गई। तस्वीर से पता चलता है कि अगस्त 2009 में माधुरी की निगरानी कराए जाने से पहले मोदी कम से कम पांच सालों से उसे जानते थे।

इसके साथ ही प्रदीप शर्मा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहे गए बात की तस्दीक भी होती है जिसमें शर्मा ने कहा कि 2005 में मोदी की तरफ से कच्छ में मौसम ए जश्न के इफ्तेताह के दौरान माधुरी वहां मौजूद थी। 2003 से 2005 के बीच शर्मा कच्छ के ज़िला मजिस्ट्रेट थे।

शर्मा ने हलफनामे में दावा किया है कि हिल गार्डन के इफ्तेताह के दौरान उन्होंने ही माधुरी से मोदी का तारूफ (Introduction) कराया। बाद में मोदी और माधुरी के बीच मैसेज और ई-मेल का तबादला और फराहम शुरू हुआ। उन्होंने कहा है कि चूंकि वह दोनों के बीच नज़दीकीयाँ के बारे में जानते थे इसलिए उन पर गबन के इल्ज़ाम लगाए गए। शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट से खातून की निगरानी की सीबीआइ जांच कराने की मांग की है।

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