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जिंदा पत्नी का किया अंतिम संस्कार, अस्पताल ने बताया था मृत

ग्रेटर नोएडा। चौबीस वर्षीय महिला रचना सिसोदिया अभी जिन्दा थी कि उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालाँकि डॉक्टरों ने गलती से उसे मृत घोषित कर दिया था। जांच कर रहे पैनल के डॉक्टरों का कहना है कि लड़की के फेफड़ों और हवा की नली के अंदर जले कण मिले हैं और ऐसा तब ही होता है जब किसी को जिंदा जलाया जाता है। अस्पताल ने दावा किया था कि फेफड़ों के संक्रमण से उसकी मौत हो गई।

 
रचना के परिजनों ने बताया कि बीते साल 13 दिसंबर को वह बुलंदशहर स्थित अपने घर से लापता हो गई थी। शादी के कुछ महीनों बाद जिंदा जलाए जाने की आशंका से यूपी पुलिस ने अंतिम संस्कार के दौरान एक युवती की अधजली लाश निकाली गई। लड़की के परिजनों ने आरोप लगाया था कि रचना के पति ने उसे जिंदा जलाया है।

 

 

रिपोर्टों के अनुसार रचना के पति देवेश चौधरी (23) अपने दोस्तों के साथ उसके शव को लाये। अलीगढ़ में उसकी अंत्येष्टि की व्यवस्था की थी। तभी किसी ने दावा किया कि वह अभी भी जिंदा है। डेली मेल में प्रकाशित खबर के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश पांडे ने बताया कि लड़की की मौत 25 फरवरी को हो गई थी। इसके अगले ही दिन उसका अंतिम संस्कार किया गया, जबकि अलीगढ़ में हुए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसकी सांस लेने वाली नली में राख पाई गई थी जिसका मतलब यह है कि जलाए जाते समय वह जिंदा थी और सांस ले रही थी। जिस वक्त रचना के शव को बाहर निकाला गया वह 70 फीसदी जल चुकी थी।

 
पुलिस ने उसकी गुमशुदगी को लेकर उसके पति देवेश चौधरी (23) और 11 अन्य के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कीं। रचना के मामा कैलाश सिंह ने कहा कि हमने उसे काफी खोजा लेकिन सब बेकार रहा। बाद में हमें पता चला कि वह देवेश के साथ रह रही है। हम अलीगढ़ के उस गांव भी पहुंचे लेकिन वे वहां नहीं मिले। पड़ोसियों के मुताबिक देवेश और रचना शादी के बाद काफी कम समय के लिए अलीगढ़ में रहे और बाद में नोएडा शिफ्ट हो गए। पुलिस ने उसके पति और 11 अन्य लोगों के खिलाफ कई मामले दर्ज किए।

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