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जुनूबी सूडान: कैंप से बाहर निकलना मौत को दावत देना है

जुनूबी सूडान में जारी मुसल्लह तसादुम और सयासी अफ़रातफ़री के सबब हज़ारहा अफ़राद ने दारुल हुकूमत जोबा में क़ायम अक़वामे मुत्तहिदा के कैम्पों में पनाह ले रखी है। इन कैम्पों में बसने वाले अफ़राद, बिलख़ुसूस मर्द, शदीद ख़ौफ़ और हिरास का श

जुनूबी सूडान में जारी मुसल्लह तसादुम और सयासी अफ़रातफ़री के सबब हज़ारहा अफ़राद ने दारुल हुकूमत जोबा में क़ायम अक़वामे मुत्तहिदा के कैम्पों में पनाह ले रखी है। इन कैम्पों में बसने वाले अफ़राद, बिलख़ुसूस मर्द, शदीद ख़ौफ़ और हिरास का शिकार हैं।

जोबा यूनीवर्सिटी से ग्रैजुएशन मुकम्मल करने वाले 29 साला स्टूडेंट के बाक़ौल कैंप से बाहर निकलना काफ़ी मुश्किल काम है क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि लोग उन्हें देख रहे हैं। उन्हों ने कहा, ये लोग हर जगह आप का पीछा करते हैं और आप को क़त्ल कर के ही दम लेंगे।

जुनूबी सूडान में हुकूमत और बाग़ीयों के दरमयान तक़रीबन दो हफ़्ते क़ब्ल शुरू हुए मुसल्लह तसादुम ने क़बाइली फ़सादाद की शक्ल अख़्तियार करते हुए मुल्क के बेशतर हिस्सों को अपनी लपेट में ले लिया है।

जोबा में क़ायम अक़वामे मुत्तहिदा के दो कैम्पों में ताज़ा इत्तिलाआत के मुताबिक़ क़रीब 25 हज़ार अफ़राद ने पनाह ले रखी है जबकि मुल्क के दीगर हिस्सों में क़ायम ऐसी पनाह गाहों में मज़ीद 40 हज़ार अफ़राद मौजूद हैं।

लग भग 5 हज़ार बच जाने वाले मुसल्लह नौजवान बोर से 18 किलोमीटर दूर सरकारी दस्तों से टकराए।

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