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जुबली हॉल में ए पी और तेलंगाना हुकूमतों का क़ानूनसाज़ कौंसिल

आसिफ़ साबह नवाब मीर उसमान अली ख़ान की यादगार जुबली हॉल को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना हुकूमतें बतौर क़ानूनसाज़ कौंसिल इस्तेमाल कर रही हैं लेकिन इस तारीख़ी इमारत के लॉन में वाक़े मस्नद शाही दोनों हुकूमतों की ग़फ़लत का शिकार है। इस तारीख़ी इमारत निगहदाश्त और मुरम्मत पर हुकूमतों की कोई तवज्जा नहीं जबकि करोड़ों रुपये दीगर कामों के लिए मंज़ूर किए जा रहे हैं।

जुबली हॉल के लॉन में मौजूद मस्नद शाही की हालत इंतिहाई ख़स्ता हो चुकी है और अंदेशा है कि अगर उस की मुरम्मत पर फ़ौरी तवज्जा नहीं दी गई तो ये मुनफ़रद गुंबद नुमा मस्नद शाही मुनहदिम हो जाएगी। आसिफ़ साबह नवाब मीर उसमान अली ख़ान इसी मस्नद शाही से फ़रमान जारी करते थे जिस की तसावीर आज भी जुबली हॉल में आवेज़ां हैं।

रियासत की तक़सीम के बाद मौजूदा क़ानूनसाज़ कौंसिल की इमारत को आंध्र प्रदेश के लिए अलॉट कर दिया गया जबकि जुबली हॉल को तेलंगाना क़ानूनसाज़ कौंसिल में तब्दील कर दिया गया। दोनों हुकूमतों ने अपने अपने कौंसिल के अंदरूनी हिस्सा में तज़ईन नव और आराइश पर भारी ख़र्च किया है लेकिन इमारत के बाहरी हिस्सा पर कोई तवज्जा नहीं दी गई जिस के नतीजे में इमारत के वजूद को ख़तरा बढ़ता जा रहा है।

जुबली हॉल के लॉन में वाक़े गुंबद नुमा मस्नद शाही जो इस इमारत की ख़ूबसूरती में इज़ाफ़ा का सबब है, उस की छत बोसीदा हो चुकी है और कई हिस्से टूट कर अंदरूनी मिट्टी और लोहे की सलाखें दिखाई दे रही है। असेंबली और कौंसिल के आग़ाज़ से क़ब्ल इमारतों की आहक पाशी की रिवायत है लेकिन निज़ाम हैदराबाद की ये तारीख़ी इमारत शायद हुक्काम की नज़र में तहफ़्फ़ुज़ की मुस्तहिक़ नहीं।

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