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जुवेनाइल बिल पर बहस के दौरान शब्‍दों की सीमा लांघ गए ये सांसद महोदय

नई दिल्‍ली: जुवेनाइल बिल पर संसद में मंगलवार को हुई बहस के दौरान एक वरिष्‍ठ सांसद बार-बार सीमा लांघते दिखाई दिए। जघन्‍य अपराध की स्थिति में नाबालिग को भी बालिग की श्रेणी पर रखे जाने की बहस के दौरान यह नजारा देखने को मिला।

महाराष्‍ट्र से बीजेपी के सहयोगी रामदास अठावले ने बहस के दौरान कुछ ऐसी बातें कहीं, जिसको लेकर कई सांसदों ने आपत्ति दर्ज कराई। आठवले ने कहा, ‘वे जिनकी सेक्‍स संबंधी जरूरतें हैं…. उन्‍हें सबक सिखाया जाना चाहिए। उन्‍हें शादी कर लेनी चाहिए। और यदि उन्‍होंने सेक्‍स किया है तो यह सहमति से होना चाहिए।’

गौरतलब है कि आठवले कानून में किए जा रहे बदलाव के पक्ष में बोल रहे थे ताकि दुष्‍कर्म और हत्‍या जैसे जघन्‍य अपराध की स्थिति में 16 वर्ष या इससे अधिक के नाबालिग को भी वालिग की ही तरह सजा दी जा सके। इस दौरान आठवले ने एक ऐसे शब्‍द का भी इस्‍तेमाल किया जिसे कार्यवाही से निकालना पड़ा। बाद में जुवेनाइल बिल को उच्‍च सदन ने पारित कर दिया।

अच्‍छी शुरुआत के बाद ‘भटके’
वैसे आठवले ने अपने भाषण की शुरुआत शानदार तरीके से की। उन्‍होंने कहा, ‘कानून ऐसा है कि यदि 18 वर्ष से कम उम्र को कोई भी अपराध करता हैं, हम उसके खिलाफ कुछ नहीं कर सकते।’ लेकिन जल्‍द ही वे राह भटकते नजर आए। उन्‍होंने कहा, शिवाजी महाराज के समय कोई भी इस तरह के अपराध नहीं कर सकता था। उसके हाथ-पैर तोड़ दिए जाते थे। कानून में इस तरह का प्रावधान होना चाहिए कि हम बलात्‍कारी के हाथ-पैर तोड़ सकें।

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के हैं अध्‍यक्ष
55वर्ष के आठवले रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्‍यक्ष हैं। वे पिछले साल राज्‍यसभा सांसद बने हैं। वर्ष 2009 के आम चुनाव में हारने से पहले वे करीब एक दशक तक लोकसभा सांसद रहे। वर्ष 2011में आठवले बीजेपी नीत एनडीए का हिस्‍सा बने थे।

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