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जूस सेंटर्स के मशरूबात सेहत के लिए नुक़्सानदेह

ताज़ा फलों का मशरूब सेहत के लिए फ़ाइदा बख्श कहा जाता था लेकिन फ़िलहाल शहर में चलाए जाने वाले जूस सेंटर्स में दस्तयाब मशरूबात ख़ाह वो ताज़ा फलों के ही क्यों ना हों, इंतिहाई नुक़्सानदेह साबित हो रहे हैं।

ताज़ा फलों का मशरूब सेहत के लिए फ़ाइदा बख्श कहा जाता था लेकिन फ़िलहाल शहर में चलाए जाने वाले जूस सेंटर्स में दस्तयाब मशरूबात ख़ाह वो ताज़ा फलों के ही क्यों ना हों, इंतिहाई नुक़्सानदेह साबित हो रहे हैं।

नैशनल इंस्टीटियूट ऑफ़ न्यूट्रीशन की जानिब से जारी कर्दा एक रिपोर्ट के मुताबिक़ शहर में दस्तयाब फ़्रुट जूस में ज़हरीला माद्दा पाया जा रहा है। हालिया अर्सा में की गई एक तहक़ीक़ में ये बात साबित हुई है कि फलों से तैयार किए जाने वाले मशरूबात में 96.6 फ़ीसद तक मुज़िर सेहत फ़ज़्ले पाए जाते हैं।

बताया जाता है कि नैशनल इंस्टीटियूट ऑफ़ न्यूट्रीशन के साईंसदाँ एस जी डी एन लक्ष्मी रेड्डी, आर नवीन कुमार, एन बाला कृष्णा और वी सुदर्शन राव ने शहर में मौजूद मुख़्तलिफ़ जूस सेंटर्स के ताज़ा मशरूबात पर ये तहक़ीक़ की है जिस में उन्हों ने इंसानी जानों को नुक़्सान पहुंचाने वाले माद्दे की मौजूदगी का इन्किशाफ़ किया है।

साईंसदानों का कहना है कि फलों को वक़्त से पहले काबिले इस्तेमाल बनाने के लिए दी जाने वाली अदवियात के सबब ये सूरते हाल पैदा हो रही है। इस के इलावा दीगर वजूहात के बाइस भी मशरूबात में मुज़िर सेहत फ़ज़्ले पाए जाने लगे हैं।

किसी ज़माने में फलों का इस्तेमाल और फलों के मशरूबात का इस्तेमाल अच्छी सेहत का ज़ामिन क़रार दिया जाता था लेकिन नैशनल इंस्टीटियूट ऑफ़ न्यूट्रीशन की रिपोर्ट के इस इन्किशाफ़ के बाद फलों के मशरूबात ही सेहत के लिए नुक़्सानदेह साबित होने लगे हैं।

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