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जेद्दा: इस्लामिक कैलीग्राफी प्रदर्शनी में भारतीय कला का बेहतरीन प्रदर्शन

जेद्दा: इस्लामिक केलीग्राफ़ी के 3 दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन जद्दा में इंडीयन कोंसलेट जनरल ऑफ़िस के प्रेस कक्ष में किया गया।

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गुरुवार को जद्दा में भारत के राजदूत, कॉन्सल जनरल ऑफ इंडिया मोहम्मद नूर रहमान शेख़ और सियासत के एडिटर मिस्टर जाहिद अली खान ने इस्लामिक केलीग्राफ़ी और आर्ट प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था, जिसमें कई कलाकारों ने बेहतरीन  नमूने पेश किए। सुलेख के नमूने पेश किए गए और भारतीय फूड महोत्सव भी आयोजित किया गया था।

हैदराबादी कलाकार यूनुस एम हफीज ने सऊदी गजट को बताया कि उनके काम और सुलेख में अल्लाह तआला के ज़िक्र को केंद्रीय स्थान प्राप्त रहता है। उन्होंने कहा कि अल्लाह का ज़िक्र ही है जो हमें इससे जोड़े रखता है। इसमें हम जो कुछ करते हैं वह अपने दिल से करते हैं। इसीलिए यही बात उनके काम में भी दिखती है, और लोगों को भी याद दिलाता है।

यूनुस ने कहा कि उनका काम समकालीन कला और मिश्रित प्रभाव के मद्देनजर होता है। उन्होंने कहा कि यहां अल्लाह तबारक व तआला के 99 नाम लिखे गए हैं और उन्होंने बीच में अल्लाह लिखने के लिए रंगीन पेंसिल का उपयोग किए हैं। यह काम उन्होंने केवल अल्लाह का नाम दोहराते रहने के उद्देश्य से किया है। यूनुस एम हफीज जेद्दा में अगले महीने दूसरे कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि इस काम के लिए उनका चयन एक सम्मान से कम नहीं है।

उनसे कहा गया था कि वह अन्य कलाकारों को भी लाएं और अपना काम भी पेश करें। उन्हें खुशी है कि वह पहले भारतीय कलाकार हैं जिनका काम यहाँ अरब कलाकारों के साथ पेश किया जा रहा है।

सियासत मैनेजिंग एडीटर जहीरुद्दीन अली ख़ां ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस प्रदर्शनी से इस पारंपरिक कला का पुनरुद्धार प्रक्रिया में आएगा, जिसे भुला दिया गया था। उन्होंने सऊदी गजट को बताया कि हैदराबाद में कला के लगभग 3000 शे पारे हैं जो सुलेख और पेंटिंग पर शामिल हैं। उसमें महिलायें भी बहुत काम कर रही हैं जिसे इस क्षेत्र में प्रोत्साहित किया जा रहा है।

एक और हैदराबादी कलाकार अब्दुल फारूकी ने बताया कि वह प्रकृति को अपने कला में केंद्रीय मुकाम देते हैं। वह इस तरह से प्रकृति को उजागर करते हैं कि देखने वाला अल्लाह से जुड़ जाता है। वह कुरान के शब्दों का प्रयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि जो बात अल्लाह तबारक व तआला ने क़ुरान में कही है वह तस्वीर में ढालने की कोशिश करते हैं। उन्होंने अपनी एक पेंटिंग का उल्लेख किया और कहा कि उसमें एक आग के गड्ढे के चारों ओर भीड़ दिखाया गया है जिसे उस गड्ढे में धकेला जा रहा है। यह दोज़ख की अवधारणा से तय्यार की गई पेंटिंग है।

उसके नीचे उन्होंने एक आयत लिखी है जिसमें आग में डाले जाने वाले इंसानों का उल्लेख था। श्री फारूकी ने अपने दूसरे कार्यों का भी उल्लेख किया ।अब्दुल फ़ारूक़ी के संबंध में यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि वे केवल एक खत खींचते हुए मानव आकृति को तैयार करने की कोशिश करते हैं। इस प्रदर्शनी के निरीक्षण के लिए आने वाले लोगों ने उनके इस कला की जबरदस्त प्रशंसा की है, और उन्होंने इन्सानी खाका खींचे जाने का खुद अपनी नज़रों से देखा है।

 

source: Saudi gazette

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