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जैन मत से वाबस्ता ख़ातून की रज़ाकाराना मौत

बीकानेर (राजिस्थान): जैन मत की एक रस्म सांतरा पर जारिया तनाज़े के दौरान एक 82 साला ख़ातून जिसने राजस्थान हाइकोर्ट में मज़हबी रस्म पर पाबंदी के ख़िलाफ़ सुप्रीमकोर्ट में हुक्म अलतवा के बाद ग़ैर मुअय्यना भूक हड़ताल (मरण व्रत) शुरू की थी, आज फ़ौत हो गई।

बदनी देवी जोकि गुज़िश्ता एक माह से रोज़े में थी आज सुबह 8 बजे परलोक सुधार गई। ख़ानदान के एक रुकन सुरेंद्र दुर्गा ने बताया कि इन्होंने ग़दा तर्क कर दी थी और थोड़ा थोड़ा पानी पीते हुए ज़िंदा थीं और अपनी ख़ाहिश के मुताबिक़ आज फ़ौत हो गईं।

इलाक़ा गंगा शहर की साकिन बदनी देवी 17 जुलाई से मज़हबी रसूम सांतरा इख़तियार करली थी लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट में इस रस्म को ख़ुदकुशी के मुतरादिफ़ क़रार देते हुए पाबंदी आइद कर दी थी जिसके पेश-ए-नज़र अफ़रादे ख़ानदान ने मरण व्रत को तपस्सया ज़ाहिर किया था लेकिन 31 अगस्ट को सुप्रीमकोर्ट ने इस पाबंदी पर हुक्म अलतवा जारी किया।

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