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जॉब का ऑफर देकर मुकरने वाली कंपनियाँ ब्लैकलिस्ट

नई दिल्ली। इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (आईआईटी) ने विद्यार्थियों को अच्छी जॉब का ऑफर देकर मुकरने वाली कम्पनियों पर सख्त रुख अपना लिया है। आईआईटी ने ऐसे लगभग 30 रिक्रूटर्स का नाम सार्वजनिक कर दिया है, जिन्होंने उनके स्टूडेंट्स को प्लेसमेंट में जॉब ऑफर तो दिए लेकिन, वादा पूरा करने में कोताही बरती। ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (एआईपीसी) की तरफ से उठाए गए इस सख्त कदम के तहत ऐसे 30 रिक्रूटर्स की लिस्ट जारी की गई, जिनमें से 28 स्टार्टअप्स हैं। इन कंपनियों को कम से कम एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और इस साल किसी भी आईआईटी कैंपस प्लेसमेंट में शामिल होने से बैन किया जाएगा।

आईआईटी गुवाहाटी में सेंटर फॉर करियर डेवेलपमेंट की तरफ से जारी बयान के मुताबिक, जिन कंपनियों को तत्काल प्रभाव से एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है, उनमें जेटाटा, नाउफ्लोट्स, कंसल्टलेन, जिंपली, पेपरटैप, पॉर्टी मेडिकल, बाबाजॉब्स, जीपीएसके, हॉप्सकॉच, स्मार्टट्रैक सोलर सिस्टम्स, क्रेयॉन डेटा इंडिया, ग्लो होम्स टेक्नॉलजीज, टेसरा सॉफ्टवेयर (रॉकऑन), ग्रोफर्स, टेनोवा इंडिया, वेरिटी नॉलेज सॉल्यूशंस, एक्सीलेंस टेक, स्टेजिला, रोडरनर, लेक्सिनोवा टेक्नॉलजीज, लगार्ड बर्नेट ग्रुप, जॉनसन इलेक्ट्रिक जापान, मेरा हुनर, फंडामेंटल एजुकेशन, कैशकेयर टेक्नोलॉजीज, इंडसइनसाइट, क्लिकलैब्स, ग्रैबहाउस और मेड शामिल हैं। जोमाटो पर लगा बैन अभी एक साल और चलेगा। जॉनसन इलेक्ट्रिक और फंडामेंटल एजुकेशन को छोडक़र बाकी स्टार्टअप हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि आईआईटी ने पहली बार एक साल में इतनी कम्पनियों को ब्लैक लिस्ट किया है। ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (एआईपीसी) के कन्वीनर कौस्तुभ मोहंती ने इकॉनोमिक टाइम्स को बताया कि ऐसे मामले पहले भी हुए हैं, जिनमें हमने एक-दो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया है। कंपनियों के नाम सार्वजनिक करने का फैसला आम सहमति से लिया गया। हम गलती करने वालों को सख्त संदेश देना चाहते हैं।

मोहंती ने कहा कि एक मोटे अनुमान के मुताबिक कंपनियों के ऑफर वापस लेने या अपॉइंटमेंट में देरी करने के लिए आईआईटी कैंपस में लगभग 120 स्टूडेंट्स प्रभावित हुए हैं। अगस्त के मध्य में आईआईटी कानपुर में हुई एआईपीसी की मीटिंग में यह भी फैसला किया गया था कि अगर ब्लैकलिस्टेड कंपनियां सालभर बाद कैंपस आना चाहेंगी तो उनको पहले एआईपीसी को लिखित में यह बताना होगा कि उन्होंने अपने ऑफर वापस क्यों लिए थे। उनको फिर एआईपीसी के सामने प्रेजेंटेशन देना होगा और उनकी मीटिंग में हर मेंबर के साथ एक-एक कर के बातचीत करनी होगी।

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