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जोश के मर्सियों पर मुनाज़रा

हैदराबाद 29 जनवरी : उर्दू के नामवर उस्ताज़ शेअर-ओ-सुख़न जोश मलीहाबादी के मुंतख़ब मर्सियों पर तशरीह के साथ तबसरा मुबाहिसा-ओ-मुनाज़रा रूबरू जी वे के वन माल पर 29 जनवरी को शाम 7 बजकर 30 मिनट पर लामकाँ वाक़्य बंजारा हिलज़ मुनाक़िद होगा ।

हैदराबाद 29 जनवरी : उर्दू के नामवर उस्ताज़ शेअर-ओ-सुख़न जोश मलीहाबादी के मुंतख़ब मर्सियों पर तशरीह के साथ तबसरा मुबाहिसा-ओ-मुनाज़रा रूबरू जी वे के वन माल पर 29 जनवरी को शाम 7 बजकर 30 मिनट पर लामकाँ वाक़्य बंजारा हिलज़ मुनाक़िद होगा ।

सयद मुहम्मद शाहिद ने इस मुनफ़रद अदबी नशिस्त का एहतिमाम किया है । जिस में अदब दोस्त शुरका , उर्दू के इलावा अंग्रेज़ी , हिन्दी में इज़हार ख़्याल करसकते हैं। सयद मुहम्मद शाहिद जो हैदराबादी हैं और पिछ्ले 45 साल अमरीका में इंजिनियरिग में तालीम , तदरीस-ओ-तहक़ीक़ के पेशे से वाबस्ता रहने के बाद हाल ही में वज़ीफ़ा पर सबकदोश हुए हैं।

हैदराबाद में उन की इबतिदाई तालीम अंग्रेज़ी हिन्दी औरतेलुगु ज़बानों में हुई थी । इस तरह वो उर्दू के तालिब-ए-इल्म यह आलम तो नहीं हैं लेकिन उर्दू से उन की मुहब्बत-ओ-दिलचस्पी ने उन्हें अमली ज़िंदगी और पेशा विराना मसरूफ़ियात से सुबकदोशी के बाद अपनी तरफ़ राग़िब करलिया जिस का नतीजा है कि उन्हों ने इस उम्र में शीरीं ज़बान सीखें । शाहिद ने उर्दू के अपने जैसे बेशुमार मद्दाहों के लिए एक ब्लॉग www.urdushahkar.blogs pot.com क़ायम किया है जिस पर तरक़्क़ी पसंद उर्दू शारा-ए-की मुंतख़ब ग़ज़लें , नज़्में और दीगर तख़लीक़ात मौजूद हैं ।

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