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अप्रैल में प्रोग्राम ”ए मुहब्बत ज़िंदाबाद” की पेशकश: जोहर महमूद

जोहर महमूद को कॉमेडी में बेहद दिलचस्पी है, लेकिन ये मौसीक़ी से वालहाना इश्क़ रखते हैं। उन्हें इस बात का एज़ाज़ हासिल है कि उनके ऑर्केस्ट्रा पर हिन्दुस्तान के जाने माने फ़नकार जैसे कुमार सानु, उदित नारायण, अनवर, मुहम्मद अज़ीज़, अदनान समी, सुखविंदर सिंह और हेमा सरदेसाई ने गीत और ग़ज़लें पेश की हैं।

वो1993 से 2014 तक अमरीका आते-जाते रहे लेकिन वतन हैदराबाद की मुहब्बत ने उन्हें ज़िंदा दिल के शहर में वापिस आने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने अपनी कॉमेडी का सफ़र बब्बन ख़ान के ड्रामे ”अद्रक के पंजे’ से मुतास्सिर हो कर शुरू किया। उन्होंने ड्रामे ”दरवाज़े खोल दो” में अहम रोल अदा किया।

वो नए फ़नकारों को अपने जोहर इंटरनेशनल ऑर्केस्ट्रा के ज़रिये मुतआरिफ़ करवाने लगे। जोहर महमूद ने जिनका असली नाम एम-ए रहीम है। मुस्लिम कल्चर पर बनी फ़िल्म ”जान-ए-वफ़ा मे मुख़्तसर रोल किया था। इस फ़िल्म की हिदायत हैदराबाद के मुमताज़ हिदायतकार रुकनुद्दीन ने दी थी।

हैदराबाद को वापसी के बाद ये मार्च के आख़िरी या अप्रैल के पहले हफ़्ते में एक अज़ीमुश्शान कल्चरल प्रोग्राम ”ए मुहब्बत ज़िंदाबाद के उनवान से पेश करेंगे जो एक मियारी फ़ैमिली तफ़रीह होगा, जिसमें मौसीक़ी, गीत, ग़ज़ल और मुहज़्ज़ब कामेडी भी पेश होगी। वो हैदराबाद के नए टेलैंटस को मौसीक़ी के उफ़क़ पर लाने के लिए बेचैन हैं।

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