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झारखंड की अंग्रेजी नहीं समझ पा रही दिल्ली

रांची : झारखंड की अंग्रेजी को दिल्ली नहीं समझ पा रही है। दिल्ली के आला अफसर एक एम्एलए के परपोजल को अंग्रेजी से हिंदी करते हैं तो मतलब का बेमतलब हो जाता है। दो बार सुधारने की कोशिश की गयी, लेकिन सुधार नहीं हुआ। हिंदी के परपोजल का मतलब कुछ और है और अंग्रेजी का कुछ और।

क्या है मामला : झारखंड शादी रजिस्ट्रेशन विधेयक 2012 को मर्क़ज़ी दाखिला वुजरा को भेजा गया, ताकि इस विधेयक पर सदर ए ज़म्हुरिया की मंजूरी ली जा सके। विधेयक हिंदी और अंग्रेजी में भेजा गया।

फिर क्या हुआ : मर्क़ज़ी दाखिला वुजरा की कानूनी शाख की तरफ से झारखंड को यह इत्तिला किया गया कि विधेयक के हिंदी और अंग्रेजी ट्रांसलेशन में गलतियां हैं। उसका सुधार जरुरी है। बिना सुह्दार इसे सदर ए ज़म्हुरिया के सामने  गौर के लिए नहीं रखा जा सकता। इस सिलसिले में कानून महकमा की तरफ से दाखिला वुजरा की कनून शाख की तरफ से बताई गई गलतियों को ठीक किया गया। इसके बाद तो मतलब का और बेमतलब होता चला गया।

छह नवंबर 15 को सुझाव : मर्क़ज़ी दाखिला वुजरा के कानून महकमा की तरफ से छह नवंबर 2015 को कुछ सुझाव दिए गए। इस सिलसिले में विधेयक के हिन्दी और अंग्रेजी ट्रांसलेशन में गलती को सुधार तो हुई, लेकिन मतलब में खामिया आ गई। आखिरकार इसे सदर ए ज़म्हुरिया के पास भेजने से मर्क़ज़ी दाखिला वुजरा ने इनकार कर दिया।

सीएम का हुक्म : इस पूरे मामले में वज़ीरे आला रघुवर दास ने विधेयक को ही वापस कराने का फैसला लिया है। साथ ही उसमें जो गलतियां हैं, उसे ठीक करने के बाद गौर के लिए सदर ए ज़म्हुरिया को भेजा जाएगा। यह विधेयक 2012 से जेरे गौर है। इस विधेयक के लागू नहीं होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट में एक मामला भी जेरे गौर है। इस पूरे मामले पर कैबिनेट के फैसले के बाद ही विधेयक को वापस लिया जा सकेगा।

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