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झारखंड के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में 28 दिन में मरे 133 बच्चे, मैनेजमेंट कहा, मेडिकल कॉलेज के लिए यह सामान्य बात

रांची : झारखंड राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में इस साल आठ माह में 739 बच्चों की मौत हो गयी. इन्हें विभिन्न बीमारियों के कारण यहां भरती कराया गया था.
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में चार माह में 164 बच्चों की मौत को लेकर अभी जांच पूरी भी नहीं हुई कि राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में इससे भी अधिक भयावह आंकड़ा सामने आया है.
रिम्स के शिशु विभाग में  18 बेड का  स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट संचालित है. इसमें समय से पहले  जन्म लेेनेवाले व निर्धारित से कम वजनवाले बच्चों का इलाज किया जाता  है.
 इस यूनिट में अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरण लगाये गये हैं. इस विंग को शुरू करने का उद्देश्य शिशु मृत्यु दर में कमी लाना था, पर ऐसा नही हो रहा। आंकड़े अभी और साफ होने हैं ये आंकड़ा सिर्फ रिम्स का है, राजधानी रांची के निजी शिशु अस्पतालों के आंकड़े सरकार के पास नहीं हैं. अगर पूरे झारखंड राज्य का आंकड़ा निकल जाए तो आंकड़ा काफी हैरानी भर होगा।
रिम्स के शिशु विभाग की आंकड़े की मानें, तो इस माह 28 दिनों में अस्पताल में 133 बच्चों की मौत हो गयी. अब यह जांच का विषय है कि ये बच्चे किस बीमारी से पीड़ित होकर किस स्थिति में यहां भरती कराये गये थे. पर सच्चाई यह है कि ये आंकड़े काफी खौफनाक हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस अस्पताल का एक विभाग यह आंकड़ा प्रस्तुत कर रहा है, उसी के प्रबंधन को भी इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत की जानकारी तक नहीं है. पूछे जाने पर प्रबंधन की ओर से कहा गया कि यह आंकड़ा अस्वाभाविक नहीं है. किसी भी मेडिकल कॉलेज के लिए यह  सामान्य बात है.
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