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झारखंड के 60 मदरसों की मान्यता नहीं देगी सरकार, मान्यता के लिए प्रस्ताव हुआ वापस

रांची: स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के 116 शिक्षण संस्थानों के स्थायी मान्यता (प्रस्वीकृति) का प्रस्ताव वापस कर दिया है. इसमें 60 मदरसा, 40 हाइस्कूल, 15 इंटर कॉलेज व एक संस्कृत विद्यालय शामिल हैं. झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने बोर्ड की स्वीकृति के बाद इन शिक्षण संस्थानों की मान्यता का प्रस्ताव विभाग को भेजा था.
विभाग में प्रस्वीकृति के लिए बनी कमेटी ने इस पर विचार किया. कमेटी की बैठक में प्रस्ताव प्रावधान के अनुरूप नहीं हाेने की बात कही गयी. कमेटी की बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षण संस्थानों का प्रस्ताव फिर से मांगा जाये. जिन शिक्षण संस्थानों का प्रस्ताव विभाग को भेजा गया था, उसमें प्रस्ताव के साथ लगाये गये कागजात को सत्यापित नहीं किया गया था. बैठक में सदस्यों ने कहा कि संस्थान के मान्यता के लिए जो भी आवश्यक शर्त है, उससे संबंधित सभी कागजातों का भी सत्यापित होना आवश्यक है.
कागजात के सत्यापित नहीं होने की स्थिति में अगर बाद में यह बात सामने आती है कि संबंधित जानकारी सही नहीं है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि बिना संबंधित कागजात के सत्यापन के शिक्षण संस्थानों को मान्यता नहीं दी जायेगी. बैठक में माध्यमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार, झारखंड एकेडमिक काउंसिल के सचिव रजनीकांत वर्मा, माध्यमिक शिक्षा उप निदेशक अरविंद कुमार झा, संयुक्त सचिव सुचित्रा सिंह शामिल थी.
 
डीइओ को करना होगा कागजात का सत्यापन 
बैठक में बताया गया कि जैक की ओर से जिला शिक्षा पदाधिकारी को प्रस्ताव के साथ लगे कागजात को सत्यापित करने के लिए कहा गया था. जिला शिक्षा पदाधिकारी का कहना था कि वे विभागीय आदेश के अनुरूप काम करेंगे. इसके बाद बैठक में निर्णय लिया गया कि विभाग स्तर से इस आशय का निर्देश जैक को भेजा जायेगा कि प्रस्ताव के साथ लगे सभी कागजात का सत्यापित होना अनिवार्य है. जैक के माध्यम से यह निर्देश सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेजा जायेगा. उल्लेखनीय है कि शिक्षण संस्थानों की मान्यता के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी होती है. कमेटी स्कूल-कॉलेज का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट  जैक को देती है. पहले कमेटी द्वारा रिपोर्ट के प्रपत्र को ही सत्यापित किया जाता था. अब उसके साथ लगे सभी कागजात को भी कमेटी के सभी सदस्य द्वारा सत्यापित किया जायेगा.
जांच रिपोर्ट में होती है गड़बड़ी 
शिक्षण संस्थानों की मान्यता के लिए जिला स्तर से जो रिपोर्ट झारखंड एकेडमिक काउंसिल को भेजी जाती है, उसमें गड़बड़ी की बात सामने आती रही है. पूर्व में कुछ जिला शिक्षा पदाधिकारी ने ऐसे शिक्षण संस्थानों की मान्यता की अनुशंसा कर दी थी, जो टेंट में संचालित किये जा रहे थे. संस्थान के पास मापदंड के अनुरूप न तो भवन था, न ही जमीन. संस्थान द्वारा जमीन कहीं और दिखाया गया था, जबकि शिक्षण संस्थान का संचालन कहीं और किया जा रहा था.
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