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झारखंड में 35 कंपनियां बंद, 53,000 लोग हुए बेरोजगार

झारखंड में 35 से ज़्यादा स्टील कंपनियां बंद हो चुकी हैं। कई जेरे तामीर कंपनियों ने भी अपना काम बंद कर दिया है। इस वजह से 53,000 से ज़्यादा लोग बेरोजगार हो गये हैं। जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में ही 50 हजार से ज़्यादा मुलाज़िमीन पर असर पड़ा

झारखंड में 35 से ज़्यादा स्टील कंपनियां बंद हो चुकी हैं। कई जेरे तामीर कंपनियों ने भी अपना काम बंद कर दिया है। इस वजह से 53,000 से ज़्यादा लोग बेरोजगार हो गये हैं। जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में ही 50 हजार से ज़्यादा मुलाज़िमीन पर असर पड़ा है. हालत यह है कि गुजिशता एक साल से कई कंपनियों में तंख्वाह तक नहीं दिये जा रहे हैं। लातेहार के चंदवा में भी अभिजीत ग्रुप के पावर प्लांट की तामीर का काम अक्तूबर से ही बंद है। इसके चलते तीन हजार से ज़्यादा लोग बेरोजगार हो चुके हैं। 700 से ज़्यादा मुलाज़िमीन नौकरी छोड़ कर दूसरी जगह चले गये हैं।

इक़्तेसादी मदद न मिलना सबसे बड़ी वजह :

मंदी के दौर से गुजर रही कंपनियां अब आगे चलाने में नाकाबिल ज़ाहिर कर रही हैं। माली अदारों ने कंपनियों को माली मदद देने से इनकार कर दिया है। इसके चलते ज़ेरे तामीर कंपनियों का काम रुक गया है। चालू कंपनियां प्रोडक्ट्शन नहीं कर पा रही है। रॉ मैटेरियल की कमी भी एक बड़ी वजह है। कोल तक़सीम में सीबीआइ जांच की वजह से कंपनियां आगे काम करने में सहम रही हैं।

माली अदारे भी फायनेंस करने से इनकार कर रहे हैं। बड़ी कंपनियों की प्रोजेक्ट फंस चुकी है। एशिया के बड़े इंडस्ट्रियल इलाके के तौर में अपनी पहचान बना चुका आयडा इलाक़े तकरीबन वीरान हो चुका है। टाटा मोटर्स जैसी कंपनी अपनी मल्टी एक्सल प्लांट को जमशेदपुर से शिफ्ट कर पंतनगर (उत्तराखंड) ले जाने की तैयारी कर चुका है। 225 से ज़्यादा कंपनियां सिर्फ टाटा मोटर्स से ही जुड़ी हुई हैं। जिन लोगों ने मल्टी एक्सल प्लांट के एंसीलियरी के तौर पर अपनी पहचान बनायी थी, उनके ऊपर भी बंदी का खतरा मंडराने लगा है। सौ साल पुरानी टाटा स्टील कंपनी को झारखंड के टेंटोपोशी में ग्रीनफील्ड प्लांट के लिए जमीन नहीं मिल रही है। अब टाटा स्टील का झारखंड से पहले ओड़िशा में बड़ा सरमायाकारी हो रहा है। वहां करीब छह मिलियन टन का स्टील प्लांट शुरू करने पर काम ज़ोर-शोर पर चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि करीब 2015 तक ओड़िशा में प्रोडक्शन शुरू हो जायेगा।

बैंकों की रकम फंसी

रियासत में कंपनियों के बंद होने या उनके काम रुकने से माली अदारों के तकरीबन 18 हजार करोड़ से ज़्यादा की रकम फंस चुकी है। इनमें अहम तौर से एसबीआइ, आरइसी, आंध्रा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूको बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।

बेरोजगारों की बढ़ रही तादाद

इन कंपनियों के बंद होने से रियासत में बेरोजगारों की तादाद बढ़ती जा रही है। इन कंपनियों के मजदूर अपनी रोजी- रोटी की तलाश में दूसरे रियासतों की तरफ पलायन करने को मजबूर हैं। टाटा मोटर्स की तरफ से अपने कुछ एक्सल मॉडलों को पंतनगर शिफ्ट किये जाने की हालत में तकरीबन 10 से 15 हजार और मजदूर बेकार हो जायेंगे। आयडा इलाक़े में 500 से 600 कंपनियां ऐसी हैं, जो सिर्फ टाटा मोटर्स पर डीपेंड हैं।

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